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हिमकेयर जांच में तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से पूछताछ की तैयारी, डॉ. जनक राज से हो चुके सवाल

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 2 Hours Ago • 1 Min Read

हिमकेयर योजना से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गई है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की एसआईटी तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से पूछताछ की तैयारी कर रही है। विजिलेंस इससे पहले आईजीएमसी के तत्कालीन वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक और वर्तमान भाजपा विधायक डॉ. जनक राज से योजना के तहत उपचार, दावों की निगरानी और भुगतान प्रक्रिया को लेकर पूछताछ कर चुकी है।

शिमला

विजिलेंस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए हिमकेयर योजना के संचालन, निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल करने, दावों की जांच, भुगतान प्रक्रिया और ऑडिट व्यवस्था से जुड़े रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। जांच में यह देखा जा रहा है कि योजना के संचालन के दौरान शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर निगरानी की क्या व्यवस्था थी। उपचार की दरें तय करने, निजी अस्पतालों को योजना में शामिल करने और उनके दावों के सत्यापन से संबंधित फैसले किस स्तर पर लिए गए, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

शिकायतों और ऑडिट आपत्तियों का रिकॉर्ड जांच में

जांच एजेंसी स्वास्थ्य विभाग को मिली शिकायतों और ऑडिट आपत्तियों पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी देख रही है। विजिलेंस ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शिमला से संबंधित दस्तावेज खंगाले हैं। निजी अस्पतालों की ओर से हिमकेयर के तहत प्रस्तुत दावों और उनके समर्थन में लगाए गए दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि उपचार से लेकर दावा तैयार करने, उसके सत्यापन और भुगतान तक निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

जुलाई में सामने आई जांच रिपोर्ट में 100 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध भुगतान के संकेतों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार 71 निजी अस्पतालों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में हैं। इन अस्पतालों में मरीजों के उपचार, दावों, बिलिंग और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। रिपोर्ट में कुछ संस्थानों के न्यूनतम स्वास्थ्य मानकों को पूरा किए बिना संचालित होने और संदिग्ध बिलिंग से जुड़े तथ्य सामने आने का भी उल्लेख किया गया था।

नीतिगत मंजूरियों और निगरानी प्रक्रिया पर पड़ताल

प्रशासनिक स्तर की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि हिमकेयर योजना के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों ने क्या प्रक्रिया अपनाई थी। तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव से नीतिगत मंजूरियों, योजना के संचालन और निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल करने से जुड़े निर्णयों के बारे में जानकारी ली जा सकती है। विजिलेंस स्वास्थ्य निदेशालय, सचिवालय और आईजीएमसी के बीच हुए पत्राचार को भी जांच में शामिल कर रही है। उपचार दरों, अस्पतालों की सूची, दावा प्रक्रिया, भुगतान और ऑडिट से संबंधित फाइलें भी खंगाली जा रही हैं।

विजिलेंस इस मामले में आईजीएमसी के तत्कालीन वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक और वर्तमान भाजपा विधायक डॉ. जनक राज से पहले ही पूछताछ कर चुकी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनसे उनके कार्यकाल के दौरान हिमकेयर योजना के तहत उपचार, दावों, निगरानी और भुगतान प्रक्रिया के बारे में सवाल किए गए थे। जांच अब अस्पताल स्तर पर कथित अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि योजना से जुड़े प्रशासनिक फैसलों, निगरानी व्यवस्था और विभिन्न कार्यालयों के बीच हुए पत्राचार को भी जांच के दायरे में लिया गया है।

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