आईआईआईटी ऊना के युवाओं से राज्यपाल का आह्वान, हिमाचल की चुनौतियों के लिए विकसित करें तकनीकी समाधान
आईआईआईटी ऊना के आठवें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने युवा प्रौद्योगिकीविदों से हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व सूचना देने वाली तकनीक विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के साथ कृषि, जल संरक्षण और ग्रामीण उद्यमिता की चुनौतियों का समाधान खोजने में संस्थान के विद्यार्थी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। समारोह लता मंगेशकर कला केंद्र ऊना के सभागार में आयोजित किया गया, जहां 206 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।
ऊना/वीरेंद्र बन्याल
राज्यपाल ने कहा कि तकनीकी शिक्षा की सार्थकता तभी है, जब ज्ञान और नवाचार को समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ा जाए। एआई, आईओटी, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें दुनिया को तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में युवा प्रौद्योगिकीविदों को अपनी दक्षता का उपयोग उन समाधानों के विकास में करना चाहिए, जिनका लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने स्नातकों, उनके परिवारों और संकाय सदस्यों को बधाई देते हुए डिग्री को नई यात्रा की नींव बताया।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से बदलती तकनीक के साथ निरंतर सीखने और विकसित भारत-2047 के निर्माण में योगदान देने को कहा। उन्होंने तकनीकी दक्षता के साथ चरित्र, ईमानदारी और जिम्मेदार नागरिकता को भी महत्वपूर्ण बताया। विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता तथा समाज के प्रति अपने दायित्वों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ने का आह्वान किया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि आईआईआईटी ऊना के विद्यार्थी और युवा इंजीनियर ज्ञान, कौशल, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी के माध्यम से राष्ट्रीय संकल्प को नई ऊर्जा और दिशा देंगे।
युवाओं से नवाचार और उद्यमिता पर जोर
लोकसभा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि शिक्षा ज्ञान की खोज का माध्यम है और यह नए विचारों, तकनीक, नवाचार तथा उद्यमिता की राह खोलती है। उन्होंने युवाओं से चुनौतियों का साहस के साथ सामना करने, मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों को समझने, नशे से दूर रहने, खेलों से जुड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने को कहा। परमवीर चक्र से सम्मानित शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के “ये दिल मांगे मोर” के जज्बे का उल्लेख करते हुए उन्होंने देश के लिए और बेहतर करने की भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

राज्यसभा सांसद प्रो. सिकंदर कुमार ने विद्यार्थियों से रोजगार खोजने के साथ रोजगार सृजक बनने और ज्ञान, विज्ञान, कला तथा तकनीक के माध्यम से समाज व राष्ट्र के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने हिमाचल की बर्फबारी, भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों के समाधान के लिए नई तकनीक विकसित करने पर जोर दिया। साथ ही तकनीक को समाज के विभिन्न वर्गों और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचाने, जिज्ञासु बने रहने तथा चरित्र और ईमानदारी से समझौता नहीं करने की बात कही। समारोह में स्नातकों ने सत्यनिष्ठा, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय एकता और समाज सेवा की शपथ भी ली।
206 विद्यार्थियों को मिली उपाधि
दीक्षांत समारोह में कुल 206 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 189 बीटेक और 17 एमटेक सीएसई-डेटा साइंस के विद्यार्थी शामिल रहे। एमटेक सीएसई डेटा साइंस के पहले बैच के विद्यार्थी भी इस अवसर पर दीक्षित हुए। संस्थान के निदेशक प्रो. मनीष गौड़ ने शैक्षणिक सत्र की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए अकादमिक, प्लेसमेंट, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में संस्थान की उपलब्धियों की जानकारी दी। बीटेक स्नातक बैच ने 95.86 प्रतिशत प्लेसमेंट दर दर्ज की और प्लेसमेंट के लिए उपस्थित 169 विद्यार्थियों में से 162 का चयन हुआ।
विद्यार्थियों को 53.6 लाख रुपये वार्षिक का उच्चतम और 13.46 लाख रुपये वार्षिक का औसत पैकेज मिला। प्लेसमेंट प्रक्रिया में 70 से अधिक नियोक्ताओं ने भाग लिया। शाखावार प्लेसमेंट दर सीएसई में 96.49 प्रतिशत, ईसीई में 98.31 प्रतिशत और आईटी में 92.45 प्रतिशत रही। शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए बीटेक सीएसई में वंश गाबा ने स्वर्ण, अमृतांश झा ने रजत और पारस त्यागी ने कांस्य पदक प्राप्त किया। बीटेक ईसीई में चंद्रादित्य परमार को स्वर्ण, कौस्तुभ अग्रवाल को रजत और शर्मा विवेक अनिलकुमार को कांस्य पदक मिला।
बीटेक आईटी में अंशिका अरोड़ा और हर्ष यादव ने स्वर्ण, तुषार ने रजत तथा आर्यन आर्या ने कांस्य पदक हासिल किया। एमटेक सीएसई डेटा साइंस में अंकुर शर्मा को स्वर्ण, शिवांगी ठाकुर को रजत और किशन श्रीवास्तव को कांस्य पदक प्रदान किया गया। समारोह में एचपीएसआईडीसी के पूर्व उपाध्यक्ष प्रो. राम कुमार, उपायुक्त जतिन लाल, पुलिस अधीक्षक सचिन हिरेमठ, शासी मंडल एवं सीनेट के सदस्य, संकाय सदस्य, अभिभावक और संस्थान समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन कुलसचिव रवि सैनी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।