भारत-बांग्लादेश सीमा पर नागरिकों की वापसी प्रक्रिया में गतिरोध, कई बॉर्डर पॉइंट्स पर BGB ने प्रवेश रोका
भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई के बीच सीमा पर वापसी प्रक्रिया को लेकर कुछ स्थानों पर प्रशासनिक गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। सीमा सुरक्षा बल और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के बीच मामले के समाधान के लिए विभिन्न स्तरों पर बातचीत जारी है।
नई दिल्ली
सीमा पर वापसी प्रक्रिया को लेकर स्थिति
भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और सत्यापन से जुड़ी कार्रवाई के बीच भारत-बांग्लादेश सीमा के कई क्षेत्रों में नागरिकों की वापसी प्रक्रिया चर्चा का विषय बनी हुई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सीमा के निकट कुछ स्थानों पर ऐसे लोगों की मौजूदगी दर्ज की गई है जिन्हें भारतीय एजेंसियां बांग्लादेशी नागरिक मान रही हैं और जिनकी वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि, कुछ मामलों में पहचान और नागरिकता सत्यापन को लेकर दोनों देशों की एजेंसियों के बीच समन्वय की आवश्यकता सामने आई है। इसी कारण कई स्थानों पर संबंधित व्यक्तियों की वापसी प्रक्रिया तत्काल पूरी नहीं हो सकी है।
लालमोनिरहाट क्षेत्र में घटनाक्रम
बांग्लादेश के समाचार पत्र द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, लालमोनिरहाट जिले के तीन अलग-अलग सीमा बिंदुओं पर कुल 33 लोगों को बांग्लादेश में प्रवेश दिलाने के प्रयास किए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने इन लोगों को तत्काल प्रवेश देने से इनकार कर दिया। BGB अधिकारियों का कहना है कि संबंधित व्यक्तियों की नागरिकता और पहचान संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन आवश्यक है। रिपोर्ट के मुताबिक यह घटनाक्रम सुबह लगभग 5 बजे के आसपास विभिन्न सीमा क्षेत्रों में सामने आया।
BGB का पक्ष
BGB-15 लालमोनिरहाट बटालियन के कमांडिंग अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल मेहदी इमाम ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा कि संबंधित लोगों को सीमा की शून्य रेखा (Zero Line) के निकट रोका गया। उन्होंने बताया कि सीमा क्षेत्र में अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है और स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी गई है। उनके अनुसार, इस विषय पर भारत की सीमा सुरक्षा बल (BSF) के साथ संवाद जारी है तथा दोनों पक्ष प्रशासनिक और प्रक्रियागत पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। BGB अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को स्वीकार करने से पहले उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि आवश्यक प्रक्रिया का हिस्सा है।
विभिन्न बॉर्डर आउटपोस्ट पर गतिविधियां
BGB मीडिया सेल के अनुसार, BGB-61 तीस्ता बटालियन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले बाराखाटा बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) क्षेत्र में 11 लोगों की आवाजाही की सूचना मिली थी। इसके अतिरिक्त पैशात्तीबारी BOP क्षेत्र में भी 10 अन्य लोगों के सीमा की ओर बढ़ने की जानकारी सामने आई। सूचना मिलने के बाद BGB की गश्ती टीमें संबंधित स्थानों पर पहुंचीं और स्थिति का आकलन किया। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित व्यक्तियों को सीमा क्षेत्र में ही रोका गया और उन्हें बांग्लादेशी क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने दिया गया।
अन्य क्षेत्रों में भी रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दुर्गापुर और दिघलतारी बॉर्डर आउटपोस्ट क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की गतिविधियां दर्ज की गईं। BGB की KR पेट्रोलिंग टीमों ने सीमा स्तंभ संख्या 925 और 927 के निकट 12 लोगों को बांग्लादेश में प्रवेश करने से रोका। वहीं, बांग्लादेश के समाचार पत्र प्रथम आलो ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि बंगाबाड़ी सीमा क्षेत्र में 28 लोगों को बांग्लादेश में प्रवेश करने से रोका गया। इन घटनाओं के बाद संबंधित सीमा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई और स्थानीय स्तर पर अधिकारियों के बीच संपर्क बनाए रखा गया।
BSF और BGB के बीच फ्लैग मीटिंग
मामले को लेकर दोनों देशों की सीमा सुरक्षा एजेंसियों के बीच फ्लैग मीटिंग आयोजित की गई। रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार दोपहर बंगाबाड़ी सीमा क्षेत्र में हुई बैठक में BSF और BGB अधिकारियों ने स्थिति की समीक्षा की। बैठक के दौरान संबंधित व्यक्तियों की पहचान, नागरिकता सत्यापन और वापसी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, BSF अधिकारियों ने कहा कि मामले को वरिष्ठ स्तर पर भी उठाया जाएगा ताकि प्रक्रियागत समाधान निकाला जा सके। दोनों एजेंसियां सीमा प्रबंधन से जुड़े स्थापित प्रोटोकॉल के तहत संवाद बनाए हुए हैं।
अवैध घुसपैठ के खिलाफ अभियान
भारत के विभिन्न राज्यों और शहरों में अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेजों और पहचान सत्यापन से जुड़े मामलों पर प्रशासनिक एवं पुलिस कार्रवाई जारी है। पश्चिम बंगाल के अलावा दिल्ली, अहमदाबाद, गुरुग्राम और अन्य क्षेत्रों में भी संबंधित एजेंसियां दस्तावेजों की जांच, सत्यापन अभियान और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत कार्रवाई कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभियान का उद्देश्य वैध और अवैध निवासियों के बीच अंतर स्पष्ट करना तथा कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करना है। विभिन्न राज्यों में स्थानीय प्रशासन, पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं तथा प्रत्येक मामले में दस्तावेजी सत्यापन को प्राथमिकता दी जा रही है।