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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा शुरू, रघुनाथ जी की रथयात्रा में 347 से अधिक देवी-देवता शामिल

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

कुल्लू के ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में सप्ताह भर चलने वाले अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव का शुभारंभ राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने किया। उत्सव की शुरुआत भगवान रघुनाथ जी की पारंपरिक रथयात्रा से हुई, जिसमें कुल्लू घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से आए 347 से अधिक देवी-देवताओं ने भाग लिया। राज्यपाल ने इसे देव संस्कृति, लोक परंपराओं, सामूहिक आस्था और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक बताया।

कुल्लू

राज्यपाल ने प्रदेशवासियों को दशहरा उत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देव संस्कृति और लोक संस्कृति का अनूठा संगम इस आयोजन को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि परंपराएं केवल अतीत की विरासत नहीं हैं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए मार्गदर्शन का स्रोत भी हैं। इन परंपराओं का संरक्षण करने और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी समाज के सभी वर्गों की है। इस अवसर पर लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उपस्थित रहीं।

सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुटता का आह्वान

विजयादशमी के संदेश का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, कर्तव्य, त्याग, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने लोगों से नशाखोरी, हिंसा, भ्रष्टाचार और समाज में वैमनस्य पैदा करने वाली शक्तियों के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया। साथ ही नागरिकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना अपनाने तथा राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने के लिए आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की अपील की।

राज्यपाल ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत की परिकल्पना आर्थिक समृद्धि, तकनीकी उन्नति, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव पर आधारित है। उन्होंने लोगों से इस राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में सक्रिय योगदान देने को कहा। युवाओं से नशे से दूर रहने, नए कौशल सीखने, प्रौद्योगिकी और नवाचार अपनाने, पर्यावरण की रक्षा करने तथा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का भी आह्वान किया गया।

पर्यटन और स्थानीय उत्पादों को मिलता है मंच

राज्यपाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण मंच है। यह आयोजन पर्यटन के साथ स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों, रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के अवसर उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि उत्सव के आर्थिक लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचने चाहिए, जबकि इसकी पारंपरिक पहचान और प्रामाणिकता भी सुरक्षित रहनी चाहिए। विकास के साथ प्रदेश के पर्वतों, वनों, नदियों और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित करने पर भी उन्होंने बल दिया।

राज्यपाल ने भगवान रघुनाथ जी से हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश की शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। इसके बाद उन्होंने सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और गैर-सरकारी संगठनों की प्रदर्शनियों का उद्घाटन कर विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल, पूर्व सांसद रजनी पाटिल, विधायक विनय कुमार, सुंदर सिंह ठाकुर, भुवनेश्वर गौड़, लोकेंद्र कुमार, सुरेंद्र शौरी, उपायुक्त अमित कुमार शर्मा और पुलिस अधीक्षक अभिषेक एस. सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

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