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कांगड़ा में माचा चाय उत्पादन की संभावनाओं पर जोर, जाईका मिशन ने एचपीसीडीपी फेज-II की प्रगति की समीक्षा की

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 13 Jun 2026 • 1 Min Read

जाईका इंडिया मिशन ने कांगड़ा और पालमपुर क्षेत्र के भ्रमण के बाद हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (एचपीसीडीपी फेज-II) के तहत संचालित विभिन्न गतिविधियों, उपलब्धियों और प्रगति की समीक्षा की। बैठक में किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने, कृषि उद्यमिता को मजबूत बनाने तथा मूल्य संवर्धन से जुड़े प्रयासों पर चर्चा की गई। इसके अलावा प्रदेश में माचा चाय उत्पादन और प्रसंस्करण से संबंधित संभावनाओं, बाजार अवसरों तथा भविष्य की रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

धर्मशाला

एचपीसीडीपी फेज-II की प्रगति की समीक्षा

धर्मशाला स्थित होटल धौलाधार हाइट्स में आयोजित समापन बैठक में जाईका इंडिया मिशन के प्रतिनिधियों ने हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (एचपीसीडीपी फेज-II) के तहत संचालित गतिविधियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। यह बैठक कांगड़ा और पालमपुर क्षेत्र के विभिन्न परियोजना स्थलों के भ्रमण के बाद आयोजित की गई, जहां मिशन ने किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), कृषि उद्यमियों तथा परियोजना से जुड़े अधिकारियों के साथ संवाद किया। समीक्षा के दौरान कृषि अवसंरचना विकास, आधुनिक खेती तकनीकों के उपयोग, मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण तथा बाजार संपर्क बढ़ाने से संबंधित कार्यों का मूल्यांकन किया गया।

किसानों की आय और कृषि उद्यमिता पर चर्चा

बैठक के दौरान किसानों की आय में वृद्धि, फसल विविधीकरण, कृषि उद्यमिता, मूल्य संवर्धन तथा किसान उत्पादक संगठनों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने बताया कि एचपीसीडीपी फेज-II के माध्यम से किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली बागवानी, सब्जी उत्पादन, मसाला फसलों, कृषि प्रसंस्करण और बाजारोन्मुख कृषि गतिविधियों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतर्गत कृषि व्यवसाय को बढ़ावा देने, किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने तथा उत्पादों के बेहतर विपणन के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त किसान उत्पादक संगठनों को संस्थागत रूप से मजबूत बनाने और कृषि आधारित उद्यमों के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

माचा चाय क्षेत्र में संभावनाओं का उल्लेख

जाईका इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि ताकेउची ताकुरो ने परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों और किसानों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में माचा (Matcha) चाय के उत्पादन और प्रसंस्करण के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि कांगड़ा क्षेत्र पहले से ही अपनी विशिष्ट चाय उत्पादन परंपरा के लिए जाना जाता है और यहां की जलवायु, ऊंचाई तथा प्राकृतिक परिस्थितियां विशेष गुणवत्ता वाली चाय के उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर माचा चाय की मांग लगातार बढ़ रही है और इस क्षेत्र में मूल्य संवर्धन आधारित कृषि गतिविधियों के माध्यम से किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। अनुसंधान संस्थानों, चाय उत्पादकों और निजी क्षेत्र के सहयोग से इस दिशा में आगे बढ़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

भावी रणनीतियों पर विचार-विमर्श

बैठक में जाईका मिशन के सदस्यों, परियोजना अधिकारियों, कृषि विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों ने हिमाचल प्रदेश के चाय क्षेत्र के विकास, विशेषकर माचा चाय उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने से संबंधित संभावित रणनीतियों और कार्ययोजनाओं पर विचार-विमर्श किया। चर्चा के दौरान उत्पाद गुणवत्ता सुधार, प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार, ब्रांडिंग, विपणन नेटवर्क सुदृढ़ीकरण तथा निर्यात संभावनाओं जैसे विषयों को शामिल किया गया। इसके अलावा कृषि आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने, किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और मूल्य संवर्धित उत्पादों के माध्यम से प्रतिस्पर्धी बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।