मामले की संक्षिप्त जानकारी
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कुल्लू जिले के तोश गांव में हुई वैभव यादव की संदिग्ध मौत के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने पुलिस अधिकारियों की जांच पर संदेह जताया और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
कोर्ट के आदेश
- जांच पर संदेह:
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने पुलिस द्वारा मामले में की जा रही जांच पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि पुलिस को सूचना मिलने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। - सीबीआई को सौंपे गए निर्देश:
अदालत ने डीजीपी हिमाचल को तीन दिन के भीतर पूरी जांच का रिकॉर्ड सीबीआई को सौंपने के आदेश दिए।
पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई
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- एफआईआर दर्ज नहीं करना:
अदालत ने निर्देश दिया कि वे सभी पुलिस अधिकारी जिन पर शिकायत मिलने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई, उनके खिलाफ जांच बैठाई जाए। - दिशानिर्देशों का उल्लंघन:
अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की यह जिम्मेदारी थी कि वे तुरंत शिकायत प्राप्त होने पर एफआईआर दर्ज करें और मामले की छानबीन करें। सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी केस में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
मामले की जांच में अनियमितताएं
अदालत ने इस पर भी सवाल उठाया कि पुलिस को सूचना मिलने के बाद रिकॉर्ड क्यों नहीं रखा गया और डीडीआर को तुरंत दर्ज क्यों नहीं किया गया। इस पर पुलिस द्वारा कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया।
यह है मामला
9 दिसंबर 2023 को हरियाणा के चार युवा, वैभव यादव, कुशाग्र, शंशाक शर्मा और रितिका मितल, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के तोश गांव में घूमने आए थे। ये सभी सूरज गेस्ट हाउस में ठहरे थे।
- घटना की शुरुआत:
शाम 7 बजे के बाद, जब बाकी लोग डिनर करने बाहर गए, तब वैभव यादव अपनी तबियत खराब होने के कारण होटल के कमरे में लौट आया। जब उसके दोस्त कमरे में लौटे, तो वैभव वहां नहीं था। - मौके पर मिली स्थिति:
कुशाग्र ने बालकनी से देखा कि वैभव खेत में पड़ा था। वह पास जाकर देखा कि उसके नाक और मुंह से खून निकल रहा था। पुलिस को मौके पर हत्या का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला।
पोस्टमार्टम और शिकायत
- 11 दिसंबर 2023 को वैभव यादव का पोस्टमार्टम किया गया और शव को परिजनों को सौंप दिया गया।
- 14 फरवरी 2024 को वैभव यादव के पिता, बलदेव, ने हिमाचल प्रदेश के डीजीपी और कुल्लू पुलिस को लिखित शिकायत भेजी, जिसमें पुलिस की जांच पर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि होटल स्टाफ से कोई पूछताछ नहीं की गई और आईपीएस ट्रेनर विनय यादव ने स्थानीय पुलिस पर प्रभाव डाला, जिससे साक्ष्य और गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए गए।
अदालत का हस्तक्षेप
6 मार्च 2024 को एसपी कुल्लू ने शिकायत की जांच के लिए एएसपी संजीव चौहान को नियुक्त किया, लेकिन मृतक के पिता इससे संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद, 10 जुलाई 2024 को उन्होंने हिमाचल हाईकोर्ट में एक पत्र लिखकर आपराधिक रिट याचिका दायर की।
अंतिम आदेश और आगे की कार्रवाई
अदालत ने इस मामले में गहरी जांच का आदेश दिया है और 3 मार्च 2025 को इस पर अगली सुनवाई होगी।
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