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हिमाचल प्रदेश / ड्यूटी पर सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी के लिए सरकार की अनुमति अनिवार्य

हिमाचलनाउ डेस्क | 21 दिसंबर 2024 at 12:11 pm

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Himachalnow / धर्मशाला

पुलिस अधिनियम में संशोधन पर चर्चा और पारित विधेयक

हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण संशोधन पारित किया है, जिसके तहत अब ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तार करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति अनिवार्य होगी। इस संशोधन के तहत पुलिस भर्ती और कांस्टेबलों का काडर भी राज्य स्तर पर किया जाएगा।

शुक्रवार को विपक्ष के विरोध के बावजूद पुलिस अधिनियम में संशोधन से संबंधित विधेयक पारित हो गया। इस विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने सरकारी मंजूरी की आवश्यकता पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान से पुलिस अधिकारी स्वतंत्र रूप से अपना काम नहीं कर पाएंगे और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।

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विपक्ष के सवाल और सरकार की सफाई

रणधीर शर्मा और त्रिलोक जम्वाल ने पोक्सो एक्ट जैसे मामलों में कर्मचारियों की गिरफ्तारी पर सरकार की अनुमति लेने के प्रावधान पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार और विशेष व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने का एक प्रयास बताया।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि रिश्वत और हत्या जैसे संगीन मामलों में यह प्रावधान लागू नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह संशोधन केवल उन मामलों में लागू होगा जहां अधिकारी द्वेष भावना से किसी कर्मचारी के खिलाफ गलत कार्रवाई करते हैं। इसके लिए एसओपी तैयार की जाएगी, जिसमें सभी प्रक्रियाएं स्पष्ट होंगी।

विजिलेंस मैन्युअल और अधिकारियों की भूमिका

सीएम सुक्खू ने विपक्ष की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि विजिलेंस मैन्युअल में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि कई बार अधिकारी व्यक्तिगत द्वेष के कारण गलत एफआईआर दर्ज कर लेते हैं, और ऐसे मामलों में यह प्रावधान सुरक्षा प्रदान करेगा।


पंचायती राज संशोधन विधेयक: जिला परिषद वार्ड के लिए जनसंख्या सीमा घटाई गई

न्यूनतम जनसंख्या सीमा पर चर्चा

हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने शीतकालीन सत्र में पंचायती राज संशोधन विधेयक पारित किया। इसके तहत अब 25,000 की न्यूनतम जनसंख्या से कम होने पर भी जिला परिषद वार्ड बनाए जा सकेंगे। ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इस विधेयक को पेश किया।

भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने चर्चा के दौरान इस प्रावधान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिला परिषद वार्ड बनाने के लिए न्यूनतम जनसंख्या सीमा 25,000 से अधिक होनी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि विधेयक में स्पष्ट रूप से न्यूनतम जनसंख्या का उल्लेख क्यों नहीं किया गया है।

सरकार का पक्ष

मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक का उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में भी जिला परिषद के वार्डों का गठन करना है, जहां जनसंख्या घनत्व कम है। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान जनजातीय समुदायों के विकास को ध्यान में रखते हुए लाया गया है।

विधेयक का पारित होना

चर्चा के बाद इस विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। यह संशोधन राज्य के पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने और दूरदराज के क्षेत्रों में विकास को गति देने में मदद करेगा।


निष्कर्ष

ड्यूटी पर कर्मचारियों की गिरफ्तारी के लिए सरकार की अनुमति अनिवार्य करने और जिला परिषद वार्ड के लिए जनसंख्या सीमा घटाने जैसे विधेयक हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक और विकासात्मक सुधार लाने की दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं। हालांकि, इन प्रावधानों पर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस ने इन मुद्दों के दोनों पक्षों को सामने रखा।

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