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विकास, ईमानदारी ओर लोगो से जुड़ाव की मिसाल लठियानी की मासी सत्या

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

लठियानी क्षेत्र से सत्या देवी सातवीं बार चुनावी मैदान में हैं और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों तथा जनसंपर्क को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उन्होंने पंचायत स्तर पर विभिन्न सार्वजनिक कार्यों और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई है।

ऊना/वीरेंद्र बन्याल

उप मंडल बंगाणा के लठियानी के नगर-गाँवों में जब भी विकास, ईमानदारी और जनहित की बात होती है, एक नाम सबसे पहले सामने आता है- सत्या देवी। सातवीं बार चुनाव में मैदान में उतरते हुए उन्होंने साबित कर दिया है कि लोकप्रियता न केवल वक्‍त की देन है, बल्कि सच्चाई, परिश्रम और जनता के प्रति निःस्वार्थ समर्पण का फल है। इससे पहले वो प्रधान पंचायत समिति सदस्य सहित कई एहम पदों पर सेवाएं दे चुकी है। लठियानी वार्ड की “मासी” के रूप में लोगों ने उन्हें सिर्फ नेता नहीं, बल्कि परिवार की सदस्य मान लिया है। उनकी एकतरफा लोकप्रियता का राज़ इतनी ही सरल और गहरी वजहों में छिपा है। वे दिल से काम करती हैं।

लोग कहते हैं, सत्या देवी अकेले ही चल पड़ती हैं, कोई साथ दे या ना दे। यह अकेलापन आदत या मजबूरी नहीं, बल्कि निर्भीक नेतृत्व का चिन्ह है। कठिन फैसलों से कभी पीछे न हटने वाली उनकी सोच ने कई ऐसे कदम उठाए जिनसे वार्ड के आम नागरिकों का जीवन बेहतर हुआ। सड़कों की मरम्मत हो, पानी की लाइनें सुधरनी हों, या स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था- उनके प्रयासों का असर साफ दिखता है। जनता की छोटी-छोटी शिकायतों पर शीघ्र कार्रवाई और बिना राजनीति द्वेष भाव ओर बिना शोर-शराबे के काम करने का तरीका ही उनकी पहचान बन गया है।उनकी साफ-सुथरी छवि ने राजनीतिक सफर को अजेय बना दिया है।

भ्रष्टाचार के आरोपों से हमेशा दूरी, दायित्वों का ईमानदारी से पालन और पारदर्शी फैसलों ने उन्हें विरोधियों के बीच भी सम्मान दिलाया है। लोग उन्हें भरोसे के साथ वोट देते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि सत्या देवी के कामों में व्यक्तिगत लाभ की लालसा कम और समाज हित की भावना अधिक रहती है। यह भरोसा ही है जो बार-बार उनका चुनावी परिणाम मजबूत बनाता है।सामाजिक जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी ताकत है। गांव-शहर में हर समारोह और हर दुख-सुख की घड़ी में वे मौजूद रहती हैं। बुज़ुर्गों के प्रति संवेदना, महिलाओं के लिए सक्रियता और युवा पीढ़ी को अवसर देने की पहल- इन सबने उन्हें “लोगों की मासी” का दर्जा दिलाया है।

उनकी शैली भले ही सरल हो, पर संदेश सटीक और निर्णायक होता है। इसी कारण से चुनावी मंच पर उनकी रैली में अधिकतर भाषण काम कम और वादे कम, काम के किस्से ज्यादा सुनाई देते हैं।आज जब सत्या देवी सातवीं बार चुनावी दौड़ में हैं, तो विपक्ष उनके अनुभव और जनसमर्थन को चुनौती देना जानता है पर जनता का विश्वास टिका हुआ है। उनके राजनीतिक सफर का सार यही है: ईमानदारी से सेवा करो, लोगों के बीच रहो, और काम करके दिखाओ — फिर वोट अपने आप मिलते हैं। लठियानी का हर घर उन्हें जानता है और उनके निर्णयों में एक स्थिरता और पारदर्शिता महसूस करता है। इसी लगातार काम करने वाली छवि ने उन्हें न सिर्फ विजयी बनाया है, बल्कि लोगों के दिलों पर राज करने वाली नेता बना दिया है।

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