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टेलीफोन कंपनी की लापरवाही ने मां से बिछोड़ा तेंदुए का दूधमुंहा शावक

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

एक माह का तेंदुए का शावक नाहन-शिमला मार्ग पर टेलीफोन पोल के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में गिरने के बाद दो दिन तक फंसा रहा। दो युवाओं की सूचना पर वन विभाग ने रेस्क्यू अभियान चलाकर शावक को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद खुले गड्ढों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं।

नाहन

निजी टेलीफोन कंपनी की लापरवाही एक दूधमुंहे तेंदुए के शावक पर भारी पड़ गई। नाहन-शिमला मार्ग (एनएच-907ए) पर सेन की सेर-जांगीरुख के समीप टेलीफोन पोल लगाने के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में गिरा करीब एक माह का तेंदुए का शावक दो दिन तक भूख-प्यास और बेबसी में तड़पता रहा। यदि दो जागरूक युवाओं ने उसकी करुण पुकार नहीं सुनी होती, तो शायद यह मासूम जंगल के किनारे बने उसी मौत के गड्ढे में दम तोड़ देता।जानकारी के अनुसार कच्चा टैंक निवासी फहीम और जीशान शुक्रवार को जमटा की ओर घूमने जा रहे थे। रास्ते में पैराफिट के पास बैठने के दौरान उन्हें किसी छोटे जीव के रोने की आवाज सुनाई दी। पहले उन्हें लगा कि कोई बिल्ली का बच्चा गड्ढे में गिर गया है, लेकिन जब उन्होंने मोबाइल की रोशनी डालकर देखा तो उनके होश उड़ गए। गहरे गड्ढे में एक दूधमुंहा तेंदुए का शावक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था।

दोनों युवाओं ने बिना कोई जोखिम उठाए तुरंत वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही डीएफओ नाहन अवनी भूषण राय के निर्देश पर जमटा वन परिक्षेत्र के रेंज अधिकारी प्रेम कंवर, बीट अधिकारी और वन रक्षक मौके पर पहुंचे। करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान में सड़क पर कार्य कर रही जेसीबी मशीन की सहायता ली गई। शावक को नुकसान पहुंचाए बिना उसके समानांतर दूसरा गड्ढा खोदा गया और सावधानीपूर्वक उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।रेंज अधिकारी प्रेम कंवर ने बताया कि शावक की आयु लगभग एक माह है और वह काफी कमजोर तथा भूखा था। प्राथमिक देखभाल के लिए उसे पशु चिकित्सालय ले जाया गया है। इसके बाद उसे वन्यजीव विभाग, रेणुकाजी के सुपुर्द किया जाएगा, जहां उसकी विशेष निगरानी और देखभाल की जाएगी।

यह घटना कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है। सड़क किनारे इतने गहरे गड्ढे खोदने के बाद यदि उन्हें खुला छोड़ दिया जाए, तो वे केवल वन्यजीवों ही नहीं बल्कि इंसानों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। एक ओर यह मासूम अपनी मां से बिछड़ गया, वहीं दूसरी ओर यह घटना निर्माण कार्य करने वाली एजेंसियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान लगाती है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गड्ढों को समय रहते सुरक्षित ढंग से ढका या बैरिकेडिंग की गई होती तो यह हादसा टाला जा सकता था। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि वन विभाग इस लापरवाही के लिए संबंधित निजी टेलीफोन कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।

इस पूरे घटनाक्रम में फहीम और जीशान की जागरूकता तथा वन विभाग की त्वरित कार्रवाई ने एक बेजुबान वन्यजीव को नया जीवन दिया।इस पूरे घटनाक्रम में फॉरेस्ट बीओ कीर्ति और फॉरेस्ट गार्ड सिद्धार्थ व अनुज मुख्य रूप से मौजूद रहे।यह घटना एक ओर मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण है तो दूसरी ओर विकास कार्यों में बरती जा रही लापरवाही के खतरनाक परिणामों की भी गंभीर चेतावनी देती है।