आषाढ़ माह के दूसरे रविवार उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, हिमाचल और हरियाणा से पहुंचे हजारों श्रद्धालु
आषाढ़ माह के दूसरे रविवार को नाहन के प्राचीन मां त्रिभुवनी मंदिर में हिमाचल और हरियाणा से हजारों श्रद्धालु पालतू पशुओं की सलामती और समृद्धि की कामना लेकर पहुंचे। मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और भंडारे का आयोजन हुआ, जबकि श्रद्धालुओं ने वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार घी और मक्खन अर्पित कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
नाहन
जिला सिरमौर के नाहन विधानसभा क्षेत्र की कौलावाला भूड़ पंचायत स्थित प्राचीन मां त्रिभुवनी (त्रिभोणी) मंदिर में आषाढ़ माह के दूसरे रविवार को हजारों श्रद्धालुओं ने माथा टेककर पालतू पशुओं की सलामती और समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक आस्था का माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया।मां त्रिभुवनी मंदिर को पशुधन की रक्षा करने वाली देवी के रूप में विशेष मान्यता प्राप्त है। यही कारण है कि सिरमौर जिले के अलावा हरियाणा के मोरनी क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर में प्रतिवर्ष आषाढ़ तथा मार्गशीर्ष माह के चारों रविवार को मेले का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
स्थानीय श्रद्धालुओं हीरा सिंह, नवीन राणा, कमल राणा, राजेश पुंडीर, अनिल ठाकुर, संजीव ठाकुर, अनु राणा, वंदना ठाकुर, रुकमणी देवी, सुधीर ठाकुर और राकेश शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है कि जब दुधारू पशु बछड़े या बछिया को जन्म देते हैं तो पहले सप्ताह के दूध से तैयार घी और मक्खन मां त्रिभुवनी को अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु पूरे वर्ष पालतू पशुओं की जंगली जानवरों, बीमारियों और जहरीले कीट-पतंगों से रक्षा की कामना करते हैं।
नाहन, पच्छाद, श्रीरेणुकाजी के धारटीधार क्षेत्र तथा पांवटा साहिब उपमंडल सहित हरियाणा के मोरनी क्षेत्र से आने वाले पशुपालक मंदिर में घी और मक्खन अर्पित करते हैं। पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के पुजारी श्रद्धालुओं को रक्षा के चावल प्रसाद स्वरूप प्रदान करते हैं तथा अगले वर्ष पुनः माता के दरबार में आने का आशीर्वाद देते हैं।
मंदिर के पुजारी लकी शर्मा ने बताया कि आषाढ़ मास के दूसरे रविवार को हजारों श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई। उन्होंने बताया कि आषाढ़ माह के शेष दो रविवार को भी मंदिर में विशाल मेले और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।