दिल का दौरा पड़ने से पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया का निधन, पांच बार रहे विधायक
हिमाचल प्रदेश के पूर्व पर्यटन मंत्री और पांच बार विधायक रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया का मंगलवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया। उनके निधन की सूचना मिलने के बाद शाहपुर, कांगड़ा और प्रदेश के राजनीतिक हलकों में शोक है। पार्थिव शरीर अस्पताल से तियारा स्थित उनके घर लाया जा रहा है।
कांगड़ा/शाहपुर
मेजर विजय सिंह मनकोटिया के परिवार के सदस्य विदेश में रहते हैं। उनका बेटा अमेरिका में है, जबकि बेटी भी विदेश में रहती हैं। परिवार के सदस्यों के पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की तारीख और समय पर निर्णय लिया जाएगा। मनकोटिया अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं। उनके समर्थक, राजनीतिक सहयोगी और शुभचिंतक उनके लंबे सार्वजनिक जीवन तथा शाहपुर क्षेत्र से जुड़ी यादों को साझा कर रहे हैं।
सेना के बाद राजनीति में रखा कदम
मेजर विजय सिंह मनकोटिया का सार्वजनिक जीवन भारतीय सेना से शुरू हुआ था। सेना में अधिकारी के रूप में सेवाएं देने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। सैन्य सेवा से मिले अनुशासन और स्पष्ट सोच की छाप उनके राजनीतिक व्यक्तित्व में भी दिखाई देती थी। वह राजनीतिक एवं सार्वजनिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए पहचाने जाते थे और शाहपुर के साथ कांगड़ा की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे।
मनकोटिया ने वर्ष 1982 में शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया था। इसके बाद उन्होंने 1985, 1990, 1993 और 2003 में भी शाहपुर का प्रतिनिधित्व किया। वह कुल पांच बार विधायक रहे। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कांग्रेस और जनता दल के साथ काम किया तथा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी चुनाव मैदान में उतरे। बाद के वर्षों में वह भाजपा में शामिल हो गए थे।
दो बार मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली
मेजर मनकोटिया ने हिमाचल प्रदेश सरकार में दो बार मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान वह पर्यटन, नागरिक उड्डयन और कानून जैसे विभागों से जुड़े रहे। वह हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष भी रहे। वर्ष 2003 में पांचवीं बार विधायक बनने के बाद उन्हें अगले विधानसभा चुनावों में सफलता नहीं मिली। वर्ष 2007 में वह शाहपुर से चुनाव हार गए, जबकि 2012 में कांग्रेस प्रत्याशी और 2017 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पराजित हुए। वर्ष 2017 के चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रहे थे।
उनके राजनीतिक जीवन में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ मतभेद भी चर्चा में रहे। दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक संबंधों में कई उतार-चढ़ाव आए। मनकोटिया अपनी स्पष्टवादिता और मुद्दों पर बिना लाग-लपेट के बात रखने के लिए जाने जाते थे। सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बनाने के बाद भी उनका अनुभव और क्षेत्र के लोगों से संपर्क चर्चा में बना रहा।
प्रदेश के नेताओं ने जताया शोक
मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सहित कई नेताओं ने संवेदना व्यक्त की। नड्डा ने उनके निधन को हिमाचल के सार्वजनिक जीवन की बड़ी क्षति बताया। डॉ. बिंदल ने उन्हें स्पष्टवादी और निर्भीक नेता बताते हुए सैनिक से जनप्रतिनिधि तथा मंत्री तक के उनके सफर को याद किया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि मनकोटिया ने सेना और राजनीति दोनों क्षेत्रों में देश तथा प्रदेश की सेवा की। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार समेत भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी उनके निधन पर दुख जताया। कांगड़ा के विधायक पवन काजल ने कहा कि जिले ने एक अनुभवी और ईमानदार राजनीतिक चेहरा खो दिया है। उनका सार्वजनिक जीवन सेना की सेवा से शुरू होकर विधानसभा और मंत्री पद तक पहुंचा तथा करीब चार दशक तक उनकी राजनीतिक सक्रियता बनी रही।