मंडी अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी को छह महीने कैद और 9 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई
मंडी की अदालत ने चेक बाउंस मामले में आरोपी को छह महीने की कैद और 9 लाख रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई है। मामला नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत के समक्ष भुगतान न होने और चेक बाउंस से संबंधित तथ्य प्रस्तुत किए। अदालत ने मामले की सुनवाई और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई, हालांकि अपील के लिए 30 दिनों की राहत भी प्रदान की गई है।
मंडी
चेक बाउंस मामले में अदालत का फैसला
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर तीन मंडी की अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले का निपटारा करते हुए आरोपी को छह महीने की कैद और 9 लाख रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई है। यह मामला राम हरी ऑटो प्रा. लि. गुटकर मंडी द्वारा अपने अधिवक्ता महेश चोपड़ा के माध्यम से अदालत में दायर किया गया था। याचिका गोपाल कृष्ण पुत्र परमा नंद सैणी निवासी गांव सिंहन गागल बल्ह जिला मंडी के खिलाफ दायर की गई थी।
2014 में जारी किया गया था चेक
अदालत में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार मामला वर्ष 2013-14 के दौरान हुए एक समझौते से संबंधित था। आरोपी द्वारा 20 मई 2014 को भारतीय स्टेट बैंक नेरचौक शाखा का 5 लाख रुपये का चेक जारी किया गया था। कलेक्शन के दौरान संबंधित चेक बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार कई बार आग्रह करने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया, जिसके बाद मामला नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत अदालत में दायर किया गया।
अदालत ने सुनाई सजा
मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता महेश चोपड़ा ने अदालत के समक्ष विभिन्न तथ्य प्रस्तुत किए। न्यायिक दंडाधिकारी कर्म प्रताप सिंह ठाकुर ने प्रस्तुत तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए छह महीने की कैद और 9 लाख रुपये जुर्माना भरने की सजा सुनाई।
30 दिन के लिए सजा पर रोक
अदालत ने आरोपी की सजा को 30 दिनों के लिए स्थगित रखते हुए उसे ऊपरी अदालत में अपील दायर करने का अवसर दिया है। साथ ही आरोपी को व्यक्तिगत बांड पर जमानत भी प्रदान की गई है। आदेश में कहा गया है कि निर्धारित अवधि के भीतर अपील दायर नहीं होने की स्थिति में सजा को अमल में लाया जाएगा।
