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सड़क हादसे में छात्र की मौत पर परिवार को 14.44 लाख मुआवजा, ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को दिए निर्देश

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 4 Hours Ago • 1 Min Read

मंडी जिले के सुंदरनगर में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने वर्ष 2019 में हुए सड़क हादसे से जुड़े मामले में मृत छात्र के परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने बीमा कंपनी को 14.44 लाख रुपए मुआवजा देने के साथ याचिका दायर होने की तिथि से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने के निर्देश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की ओर से प्रस्तुत नशे और ट्रिपल राइडिंग संबंधी दलीलों को पर्याप्त आधार नहीं माना और मुआवजे की जिम्मेदारी कंपनी पर तय की।

मंडी

मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने सुनाया फैसला

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल सुंदरनगर ने सड़क दुर्घटना से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले 18 वर्षीय छात्र अविनाश के माता-पिता के पक्ष में निर्णय देते हुए संबंधित बीमा कंपनी को 14,44,800 रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित मुआवजा राशि पर याचिका दायर करने की तारीख से भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दुर्घटना से जुड़े रिकॉर्ड, दस्तावेज, पुलिस रिपोर्ट और बीमा कंपनी की ओर से पेश किए गए तर्कों की समीक्षा की। इसके बाद ट्रिब्यूनल ने मुआवजे की जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर तय की।

2019 में धनोटू के पास हुआ था हादसा

यह सड़क हादसा 21 अक्तूबर 2019 की रात करीब 12 बजे सुंदरनगर के धनोटू क्षेत्र के पास हुआ था। जानकारी के अनुसार अविनाश सिरडा ग्रुप ऑफ इंस्टीच्यूशंस, तरोट (कनैड़) में सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा के तीसरे सेमेस्टर का छात्र था। घटना वाली रात वह अपने मित्र मयंक के साथ मोटरसाइकिल पर जा रहा था।रिपोर्ट के अनुसार धनोटू के पास मोटरसाइकिल अचानक अनियंत्रित होकर फिसल गई। दुर्घटना में अविनाश को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई थीं। उसे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन बाद में उसकी मृत्यु हो गई। हादसे के बाद परिवार ने बीमा कंपनी से दावा प्रस्तुत किया था।

बीमा कंपनी ने मुआवजा देने पर उठाए थे सवाल

सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की ओर से मुआवजा भुगतान से बचने के लिए कई दलीलें दी गईं। कंपनी के वकीलों ने अदालत में कहा कि दुर्घटना के समय बाइक चालक कथित रूप से नशे में था। इसके अलावा यह भी दावा किया गया कि वाहन पर ट्रिपल राइडिंग की जा रही थी और सुरक्षा नियमों का पालन नहीं हुआ था।हालांकि ट्रिब्यूनल ने उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद इन दलीलों को पर्याप्त आधार नहीं माना। अदालत ने कहा कि केवल इन तर्कों के आधार पर बीमा कंपनी अपने दायित्व से अलग नहीं हो सकती। ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि बीमा पॉलिसी के तहत मुआवजा भुगतान की जिम्मेदारी कंपनी की ही बनती है।

परिवार ने एक करोड़ रुपए मुआवजे की मांग की थी

अविनाश के माता-पिता ने बेटे की मृत्यु के बाद मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल में याचिका दायर करते हुए एक करोड़ रुपए मुआवजे की मांग की थी। याचिका में छात्र की आयु, पढ़ाई और भविष्य की संभावनाओं का उल्लेख किया गया था।ट्रिब्यूनल ने मामले से जुड़े सभी तथ्यों, छात्र की उम्र, शैक्षणिक स्थिति और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए 14,44,800 रुपए की मुआवजा राशि निर्धारित की। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि मुआवजा राशि का भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाए।

ब्याज सहित भुगतान करने के निर्देश

ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी को मुआवजा राशि के साथ 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह ब्याज याचिका दायर किए जाने की तारीख से अंतिम भुगतान तक लागू रहेगा।कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार मोटर दुर्घटना मामलों में ट्रिब्यूनल मुआवजा तय करते समय पीड़ित की आयु, भविष्य की संभावनाएं, आश्रित परिवार और दुर्घटना की परिस्थितियों को ध्यान में रखता है। इसी आधार पर अदालत ने इस मामले में अंतिम आदेश पारित किया।

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