मडेढ़ा में रहस्यमयी कीट का कहर, आधे से अधिक मक्की की फसल बर्बाद होने की आशंका
किसानों ने कृषि विभाग से लगाई गुहार, विशेषज्ञ टीम भेजकर कीट की पहचान व नियंत्रण की उठाई मांग
राजगढ़
राजगढ़। सिरमौर जिले के राजगढ़ उपमंडल की ग्राम पंचायत टिक्कर के अंतर्गत मडेढ़ा गांव में मक्की की फसल पर रहस्यमयी कीट के हमले ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का दावा है कि गांव में आधे से अधिक मक्की की फसल इस अज्ञात कीट की चपेट में आ चुकी है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो पूरे क्षेत्र की फसल प्रभावित होने की आशंका है।
ग्रामीणों के अनुसार यह कीट मक्की के पौधे के तने में प्रवेश कर भीतर ही भीतर उसे खोखला कर देता है। इसके कारण पौधे धीरे-धीरे सूखने लगते हैं और अंततः पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इस प्रकार का कीट नहीं देखा, जिससे फसल को लेकर असमंजस और भय का माहौल बना हुआ है।
इन दिनों क्षेत्र में मक्की की गुड़ाई का कार्य चल रहा है। इसी दौरान बड़ी संख्या में संक्रमित पौधे सामने आए हैं, जिन्हें किसान खेतों से उखाड़कर अलग कर रहे हैं ताकि संक्रमण अन्य पौधों तक न फैले। हालांकि किसानों का कहना है कि कीट पौधों के भीतर तक पहुंच चुका है, इसलिए वे संक्रमित पौधों को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल करने से भी बच रहे हैं।
किसानों ने बताया कि उन्होंने अपने स्तर पर विभिन्न कीटनाशकों का छिड़काव भी किया, लेकिन उससे कोई विशेष लाभ नहीं मिला। उनका कहना है कि जब तक कीट की सही पहचान नहीं होगी, तब तक प्रभावी उपचार संभव नहीं है।
गांव के किसान सीतांशु दीक्षित, संजीव, सोमदत्त, राम लाल और मनोज सहित अन्य किसानों ने कृषि विभाग से मांग की है कि विशेषज्ञों की टीम तत्काल गांव पहुंचकर प्रभावित खेतों का निरीक्षण करे, कीट की पहचान कर उसके नियंत्रण के लिए प्रभावी दवा और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए।
किसानों का कहना है कि मक्की क्षेत्र की प्रमुख खाद्यान्न एवं पशु चारा फसल है। यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सैकड़ों किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और कृषि विभाग से मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि फसल को बचाया जा सके और कीट के बढ़ते प्रकोप पर समय रहते रोक लगाई जा सके।
