11 साल बाद भी बेघर विस्थापितों को नहीं मिला आशियाना, सम्मानजनक पुनर्वास को तेज हुआ संघर्ष
संघर्ष समिति का एचपीपीसीएल पर वादे पूरे करने का दबाव, सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर हाउसलेस अनुदान, भूमि, रोजगार और मुआवजे की उठाई मांग
नाहन
श्री रेणुकाजी बांध परियोजना से प्रभावित बेघर विस्थापितों ने 11 वर्ष बाद भी हाउसलेस अनुदान और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिलने पर अपना आंदोलन तेज कर दिया है। मंगलवार को नाहन में आयोजित प्रेस वार्ता में श्री रेणुकाजी बांध विस्थापित संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय ठाकुर और प्रेस सचिव योगी ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रहित में अपनी जमीन और घर छोड़ने वाले सैकड़ों परिवार आज भी मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी उन भूमिहीन परिवारों की है, जिनका एकमात्र आशियाना भी बांध परियोजना की भेंट चढ़ गया, लेकिन उन्हें आज तक आवास अनुदान नहीं मिल पाया।
समिति ने बताया कि हाल ही में हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन तथा श्री रेणुकाजी के विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार से मुलाकात कर विस्थापितों की समस्याएं विस्तार से रखी गई थीं। बेघर परिवारों की सूची उपलब्ध कराने और हाउसलेस अनुदान से जुड़ी शर्तों में संशोधन की दिशा में त्वरित कार्रवाई का आश्वासन मिलने पर दोनों का आभार व्यक्त किया गया। समिति ने बताया कि प्रबंध निदेशक ने हाउसलेस अनुदान की 75 प्रतिशत राशि एकमुश्त जारी करने का भरोसा भी दिया है।
संघर्ष समिति ने एचपीपीसीएल को सौंपे सात सूत्रीय ज्ञापन में वर्तमान निर्माण लागत के अनुरूप 27 लाख रुपये के हाउसलेस अनुदान का पुनर्मूल्यांकन करने, 250 वर्गमीटर भूखंड के लिए दी जा रही 1.50 लाख रुपये की राशि को वर्तमान बाजार दर के अनुसार बढ़ाने तथा हाउसलेस अनुदान बिना किसी शर्त के एकमुश्त देने की मांग की। इसके अलावा भूमिहीन परिवारों को कृषि योग्य भूमि उपलब्ध कराने अथवा उसके बदले उचित मुआवजा देने, डूब क्षेत्र के मंदिरों का लंबित मुआवजा जारी करने, विस्थापितों को योग्यता के आधार पर रोजगार देने और पहले चरण में कम दर पर भूमि देने वाले परिवारों को बढ़ी हुई दर का अंतर बिना न्यायालयी प्रक्रिया के देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
प्रेस वार्ता के दौरान संघर्ष समिति ने विस्थापितों के मामलों की पैरवी कर रहे अधिवक्ता की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। समिति का आरोप है कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। यदि कोई विस्थापित अधिवक्ता बदलना चाहता है तो उस पर अनुचित दबाव बनाया जाता है, जो न्याय व्यवस्था की भावना के विपरीत है। समिति ने स्पष्ट कहा कि विस्थापितों के हित सर्वोपरि हैं और उनकी आवाज को किसी भी स्तर पर दबाने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।
