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कैरियर एकेडमी स्कूल में मातृ दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं माइम प्रतियोगिता आयोजित

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 3 Hours Ago • 1 Min Read

Himachalnow / नाहन

कैरियर एकेडमी स्कूल में मातृ दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं इंटर हाउस माइम प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

नाहन

मातृ दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन

नाहन स्थित कैरियर एकेडमी स्कूल में मातृ दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को माँ के प्रेम, त्याग, समर्पण और परिवार में उनके महत्व के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ किया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने गीत, नृत्य, कविता एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। सभी प्रस्तुतियों में मातृ शक्ति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना स्पष्ट रूप से देखने को मिली। कार्यक्रम में अभिभावकों और शिक्षकों की उपस्थिति रही तथा पूरा माहौल शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ा रहा।

इंटर हाउस माइम प्रतियोगिता का आयोजन और परिणाम

कार्यक्रम के दौरान इंटर हाउस माइम प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसका विषय “माँ का प्रेम एवं परिवार में उनका योगदान” रखा गया। विद्यार्थियों ने बिना संवाद के केवल अभिनय और भाव-भंगिमा के माध्यम से सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में सभी हाउसों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। परिणामों में एटलांटिक हाउस ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, पैसिफिक हाउस द्वितीय स्थान पर रहा तथा इंडियन हाउस ने तृतीय स्थान हासिल किया।

विद्यालय प्रबंधन ने की विद्यार्थियों की सराहना

विद्यालय के चेयरमैन एस. एस. राठी ने कहा कि माँ का स्थान जीवन में सर्वोच्च होता है और ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में मूल्यों और संस्कारों को मजबूत करते हैं। निदेशक मधुलिका राठी ने कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में सहायक होती हैं। निदेशक मनोज राठी ने विद्यार्थियों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आत्मविश्वास और टीम भावना को बढ़ाते हैं। प्रधानाचार्य राजेश सोलंकी ने भी विद्यार्थियों और शिक्षकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि माँ केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं बल्कि संस्कारों की प्रथम शिक्षिका होती हैं।

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