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नाहन डिपो से 10 इलेक्ट्रिक और 7 डीजल बसें दूसरे डिपो भेजीं, परिवहन व्यवस्था पर बढ़ा दबाव

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 57 Mins Ago • 1 Min Read

सिरमौर के एचआरटीसी नाहन डिपो को जुलाई-अगस्त में मिली 25 इलेक्ट्रिक बसों में से 10 बसें करीब दो महीने के भीतर दूसरे डिपो भेज दी गई हैं। डिपो की सात डीजल बसों को भी शिमला जिले की विभिन्न इकाइयों में भेजा गया है। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब नाहन डिपो की 10 बसें पहले ही कंडम हो चुकी हैं और पांच अन्य बसों के अक्टूबर के अंत तक कंडम होने की संभावना जताई गई है। इससे जिले के बस रूटों पर दबाव बढ़ने की चिंता है।

नाहन

प्रदेश सरकार ने जुलाई में नाहन डिपो को 15 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध करवाई थीं। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने चार अगस्त को नाहन बस स्टैंड पर इन बसों का औपचारिक शुभारंभ किया था। इसके बाद 20 अगस्त तक डिपो को 10 और इलेक्ट्रिक बसें मिलीं, जिससे इनकी कुल संख्या 25 हो गई। नई बसें मिलने के बाद सिरमौर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मजबूत होने और नाहन डिपो को ई-डिपो के रूप में विकसित करने की उम्मीद बनी थी, लेकिन कुछ ही समय बाद बसों को अन्य डिपो भेज दिया गया।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार नाहन से तीन इलेक्ट्रिक बसें रोहड़ू, दो रामपुर और पांच पठानकोट डिपो भेजी गई हैं। इसके अतिरिक्त सात डीजल बसें नेरवा, तारादेवी, रोहड़ू और शिमला लोकल यूनिट को भेजी गई हैं। एक और डीजल बस शिमला लोकल यूनिट भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। एक साथ इतनी बसें बाहर जाने के कारण सिरमौर में पहले से संचालित रूटों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

पुरानी बसों के कंडम होने से बढ़ी चिंता

नाहन डिपो में बसों की कमी की स्थिति इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि करीब तीन महीने पहले इसकी 10 बसें कंडम हो चुकी हैं। अक्टूबर के अंत तक पांच और बसों के कंडम होने की संभावना बताई गई है। ऐसे में 10 इलेक्ट्रिक और सात डीजल बसों को दूसरे डिपो भेजे जाने के बाद आने वाले समय में परिवहन सेवाओं पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। बसों की उपलब्धता घटने से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में चलने वाले रूटों का संचालन प्रभावित हो सकता है।

चार्जिंग प्वाइंट और बस अड्डों का सीमित ढांचा

प्रदेश सरकार ने नाहन डिपो को ई-डिपो बनाने की घोषणा की थी। इसके साथ नादौन, हरोली और ठियोग में नए बस डिपो बनाने की योजना भी घोषित की गई थी। हालांकि, सिरमौर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए जरूरी आधारभूत ढांचा अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। जिले में नाहन बस स्टैंड, नाहन वर्कशॉप और पांवटा साहिब बस स्टैंड पर ही चार्जिंग प्वाइंट उपलब्ध हैं। सीमित चार्जिंग सुविधा के कारण इलेक्ट्रिक बसों के नियमित और व्यापक संचालन में व्यावहारिक चुनौतियां बनी हुई हैं।

सिरमौर में नाहन, पांवटा साहिब, सराहां और राजगढ़ में एचआरटीसी के अपने बस स्टैंड हैं। संगड़ाह, शिलाई, श्रीरेणुकाजी, नौहराधार और हरिपुरधार में बस स्टैंड की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण बसों को सड़क किनारे रोकना और खड़ा करना पड़ता है। इलेक्ट्रिक बसों का संचालन बढ़ाने के लिए चार्जिंग व्यवस्था के साथ पर्याप्त बस अड्डा ढांचा विकसित करना भी जरूरी चुनौती के रूप में सामने आया है।

बसों को वापस लाने का किया जाएगा प्रयास

डीडीएम रामदयाल ने बताया कि 10 इलेक्ट्रिक बसों को ट्रायल के लिए शिमला भेजा गया है। नाहन के विधायक अजय सोलंकी ने कहा कि नाहन डिपो से बसों को दूसरे डिपो भेजे जाने का मामला परिवहन मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के समक्ष उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन बसों को वापस नाहन डिपो में मंगवाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि सिरमौर में संचालित बस सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित असर को कम किया जा सके।

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