Loading...

नाहन में बनेगी प्रदेश की पहली हाई सिक्योरिटी जेल, 80 से अधिक हाई रिस्क बंदियों को रखा जाएगा

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 17 Jul 2026 • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश में हाई रिस्क और अति सुरक्षा श्रेणी के बंदियों के लिए पहली हाई सिक्योरिटी जेल स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है।नाहन में प्रस्तावित इस जेल में 80 से अधिक हाई रिस्क बंदियों को आधुनिक तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था के बीच रखा जाएगा।इस परियोजना का उद्देश्य संवेदनशील बंदियों की प्रभावी निगरानी और प्रदेश की जेल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

शिमला

हिमाचल प्रदेश में हाई रिस्क और अति सुरक्षा श्रेणी के बंदियों के लिए पहली बार अलग से हाई सिक्योरिटी जेल स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं विभाग ने इसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है। प्रस्ताव के अनुसार सिरमौर जिले के नाहन में अत्याधुनिक तकनीक से लैस हाई सिक्योरिटी जेल बनाई जाएगी, जहां प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद 80 से अधिक हाई रिस्क बंदियों को एक ही स्थान पर रखा जाएगा।जेल विभाग का मानना है कि ऐसे बंदियों की मौजूदगी से कई बार अन्य कैदियों पर उनका प्रभाव बढ़ता है, जिससे जेल का अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसी को देखते हुए उन्हें अलग उच्च सुरक्षा वाले परिसर में रखने की योजना बनाई गई है।

प्रस्तावित जेल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली, हाई रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, बायोमीट्रिक प्रवेश व्यवस्था, फेस रिकग्निशन तकनीक, डिजिटल कंट्रोल रूम, इलेक्ट्रॉनिक एक्सेस कंट्रोल और बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणाली स्थापित की जाएगी। पूरे परिसर की चौबीसों घंटे डिजिटल निगरानी की जाएगी और हर गतिविधि पर रियल टाइम नजर रखी जाएगी।प्रदेश में वर्तमान में 14 जेलें संचालित हैं, जिनमें एक केंद्रीय जेल, जिला जेलें और उप जेलें शामिल हैं। विभाग का मानना है कि हाई सिक्योरिटी जेल बनने से संवेदनशील बंदियों की निगरानी अधिक प्रभावी होगी, जेल कर्मियों पर सुरक्षा का दबाव कम होगा और अन्य जेलों में बंद सामान्य कैदियों के लिए अधिक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

पुलिस महानिदेशक (कारागार एवं सुधारात्मक सेवाएं) अभिषेक त्रिवेदी ने बताया कि हाई सिक्योरिटी जेल की स्थापना की दिशा में विभाग कार्य कर रहा है। सरकार का उद्देश्य भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में आधुनिक, तकनीक आधारित और सुरक्षित कारागार व्यवस्था विकसित करना है।