नाहन नगर परिषद में अध्यक्ष कुर्सी पर सस्पेंस, भाजपा में अंदरूनी घमासान तेज
कांग्रेस की नजर भाजपा खेमे पर, जोड़तोड़ की राजनीति ने बढ़ाई हलचल
नाहन
नाहन नगर परिषद चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद अब असली राजनीतिक लड़ाई अध्यक्ष पद की कुर्सी को लेकर शुरू हो चुकी है। 13 वार्डों वाली नगर परिषद में भाजपा ने 7 सीटें जीतकर बढ़त जरूर हासिल की है, लेकिन अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी के भीतर उभरते अलग-अलग समीकरणों ने कांग्रेस को नई राजनीतिक उम्मीद दे दी है। दूसरी ओर 6 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली कांग्रेस फिलहाल “इंतजार और मौके” की राजनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के भीतर अध्यक्ष पद को लेकर कई नामों को लेकर अलग-अलग स्तर पर हलचल बनी हुई है। संध्या अग्रवाल का नाम सबसे प्रमुख चेहरों में लिया जा रहा है, जबकि पूजा तोमर को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चाएं तेज हैं। वहीं सीमा अत्री और संजना कौर के नाम भी सियासी चर्चाओं में तैरने लगे हैं। हालांकि किसी भी ओर से खुलकर दावेदारी सामने नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने चल रही बैठकों और समर्थकों की सक्रियता ने सस्पेंस को और बढ़ा दिया है।
सूत्रों के अनुसार भाजपा के भीतर फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि अंदरूनी संतुलन बनाए रखना माना जा रहा है। पार्टी के कई खेमे अपने-अपने राजनीतिक समीकरण साधने में जुटे बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि कांग्रेस भी पूरे घटनाक्रम पर बेहद करीबी नजर बनाए हुए है और भाजपा के भीतर पैदा हो रही स्थिति को अपने लिए अवसर के रूप में देख रही है।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार नगर परिषद की राजनीति केवल संख्या बल तक सीमित नहीं रहने वाली। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने और स्थानीय कांग्रेस विधायक के राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए पार्टी हर संभावित विकल्प खुला रखना चाहती है। कांग्रेस को उम्मीद है कि यदि भाजपा के भीतर सहमति बनने में देरी होती है तो राजनीतिक समीकरण अचानक बदल भी सकते हैं।
भाजपा की स्थिति फिलहाल “बहुमत के बावजूद असहज” वाली मानी जा रही है। पार्टी के पास संख्या बल जरूर है, लेकिन अध्यक्ष पद को लेकर अलग-अलग स्तर पर चल रही चर्चाओं ने संगठन के भीतर हलचल बढ़ा दी है। राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि पिछले कुछ समय से नाहन भाजपा में जो अंदरूनी खींचतान धीरे-धीरे आकार ले रही थी, अध्यक्ष पद की दौड़ ने उसे और खुलकर सतह पर ला दिया है।
वहीं कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को बेहद रणनीतिक तरीके से देख रही है। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि यदि भाजपा में सहमति नहीं बनती तो कुछ पार्षदों के जरिए नए समीकरण तैयार किए जा सकते हैं। प्रदेश में सत्ता में बैठी कांग्रेस इस मौके को किसी भी हालत में हाथ से जाने देना नहीं चाहेगी।
अब नाहन की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि भाजपा संगठन किसी एक चेहरे पर सर्वसम्मति बना पाएगा या फिर अध्यक्ष पद की कुर्सी को लेकर जारी अंदरूनी हलचल आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मोड़ लेगी। फिलहाल नगर परिषद का गणित जितना आसान दिखाई देता है, जमीन पर उतने ही उलझे हुए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं।
