Loading...

नेपियर CO-5 से सालभर हरे चारे की उम्मीद, किसानों को बांटी गईं डेढ़ लाख कटिंग

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 39 Mins Ago • 1 Min Read

अब 12 महीने मिलेगा हरा चारा, धौलाकुआं केवीके ने किसानों तक पहुंचाई नई ‘हाथी घास’

नेपियर CO-5 ने बदली पशुपालकों की उम्मीद, दो साल में डेढ़ लाख कटिंग किसानों तक पहुंचीं; पड़ोसी राज्यों से भी बढ़ी मांग

नाहन, 4 सितंबर (हिमाचल दस्तक जिला ब्यूरो)। प्रदेश के पशुपालकों के लिए हरे चारे की सालभर रहने वाली समस्या का समाधान अब धौलाकुआं से निकलकर खेतों तक पहुंचने लगा है। कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर ने नेपियर CO-5 हाइब्रिड किस्म की उन्नत हाथी घास को स्थानीय परिस्थितियों में सफलतापूर्वक तैयार कर किसानों तक पहुंचाया है। यह घास वर्षभर उपलब्ध रहने, नरम पत्तियों और बेहतर पोषण के कारण पशुपालकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

वर्ष 2023 में तमिलनाडु एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से नेपियर CO-5 की कुछ स्टेम कटिंग धौलाकुआं स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसंधान फार्म में लाई गई थीं। स्थानीय परिस्थितियों में किए गए प्रयोग सफल रहे तो केंद्र ने इसकी रोपण सामग्री बढ़ानी शुरू कर दी। देखते ही देखते यह प्रयोग किसानों के लिए हरे चारे का एक बड़ा विकल्प बन गया।

धौलाकुआं के अनुसंधान फार्म में इस घास की ऊंचाई 12 से 14 फुट तक पहुंची है। खास बात यह है कि इसे एक बार लगाने के बाद लंबे समय तक हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे में पशुपालकों को अब केवल मौसमी चारे पर निर्भर रहने की मजबूरी से राहत मिलने की उम्मीद है।

पुरानी हाथी घास की तुलना में नेपियर CO-5 की पत्तियां अधिक नरम हैं। इसमें प्रोटीन और फाइबर की बेहतर मात्रा होने के कारण इसे पशुओं के पोषण के लिहाज से उपयोगी माना जा रहा है। पुरानी किस्म की हाथी घास में पत्तियों का खुरदरापन पशुओं के लिए समस्या बनता था, जबकि नई किस्म को पशु आसानी से खाते हैं।

यह घास बीज से नहीं बल्कि स्टेम कटिंग यानी कलम से तैयार की जाती है। गन्ने की तरह इसकी कलम खेत में लगाई जाती है। कृषि विज्ञान केंद्र ने रोपण की विभिन्न तकनीकों पर भी प्रयोग किए हैं और वर्टिकल तरीके से रोपण के बेहतर परिणाम सामने आए हैं। इसे खेत की मेढ़, बाड़ और अन्य खाली स्थानों पर भी लगाया जा सकता है।

नेपियर CO-5 की लोकप्रियता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले दो वर्षों में करीब डेढ़ लाख स्टेम कटिंग प्रदेश के विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों और किसानों तक पहुंचाई जा चुकी हैं। वर्ष 2026 में ही करीब 20 हजार कटिंग किसानों को उपलब्ध कराई गई हैं।

अब इसकी मांग हिमाचल की सीमाओं से भी बाहर पहुंच चुकी है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के किसान भी धौलाकुआं कृषि विज्ञान केंद्र से इस घास की रोपण सामग्री लेने के लिए संपर्क कर रहे हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र की अपनी पशुपालन इकाई में भी उन्नत नस्ल के पशुओं को यही नेपियर CO-5 चारा दिया जा रहा है। केंद्र के अनुभव में पशु इस घास को चाव से खाते हैं और इसके उपयोग से दुग्ध उत्पादन में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर के प्रभारी एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल ने बताया कि हरे चारे की समस्या को देखते हुए वर्ष 2023 में नेपियर CO-5 हाइब्रिड किस्म को तमिलनाडु से लाकर धौलाकुआं में प्रयोग शुरू किया गया था। स्थानीय परिस्थितियों में इसके बेहतर परिणाम सामने आने के बाद इसकी स्टेम कटिंग किसानों तक पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि यह बहुवर्षीय घास पशुपालकों को 12 महीने हरा चारा उपलब्ध करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

कुल मिलाकर, धौलाकुआं केवीके की ‘नई हाथी घास’ अब केवल एक कृषि प्रयोग नहीं रही। यह प्रदेश के हजारों पशुपालकों के लिए सालभर हरे चारे की चिंता कम करने वाला नया विकल्प बनकर उभरी है और इसकी बढ़ती मांग बता रही है कि आने वाले समय में नेपियर CO-5 हिमाचल के पशुपालन क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।

Related Topics: