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Government Decision: महिलाओं के नाम एक करोड़ तक की संपत्ति रजिस्ट्री पर 4% स्टांप ड्यूटी, विधेयक पारित

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

Government Decision: हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने मानसून सत्र के अंतिम दिन भारतीय स्टांप विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। संशोधित प्रावधान लागू होने पर एक करोड़ रुपए तक की संपत्ति की रजिस्ट्री महिला के नाम कराने पर स्टांप ड्यूटी आठ से घटकर चार प्रतिशत हो जाएगी। विधेयक में संपत्ति पंजीकरण सहित विभिन्न दस्तावेजों और सेवाओं के शुल्क में भी बदलाव किया गया है।

शिमला

विधानसभा के मानसून सत्र के आखिरी दिन कुल चार महत्त्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। भारतीय स्टांप विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस हुई, जबकि दो अन्य विधेयक बिना चर्चा के पारित कर दिए गए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार मौजूदा कानून में सुधार कर रही है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के अनुसार, विधेयक के कुल 65 प्रावधानों में से 49 में संशोधन किया जा रहा है।

संपत्ति की कीमत के आधार पर तय होंगी दरें

संशोधन के अनुसार, एक करोड़ रुपए से अधिक कीमत की संपत्ति पर महिलाओं और अन्य खरीदारों के लिए आठ प्रतिशत स्टांप ड्यूटी लगेगी। पुरुषों और अन्य खरीदारों के लिए 40 लाख रुपए तक की संपत्ति पर छह प्रतिशत तथा इससे अधिक कीमत की संपत्ति पर आठ प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है। बाहरी राज्यों के लोगों के लिए भी स्टांप ड्यूटी बढ़ाई गई है। शपथ पत्र की फीस 100 रुपए करने का प्रावधान विधेयक में शामिल है।

संपत्ति से जुड़े मामलों में भुगतान की क्षमता रखने वाले लोगों को ही संबंधित समझौतों और दस्तावेजों में शामिल करने का प्रावधान भी किया गया है। विधेयक में वकील की फीस 100 से बढ़ाकर 1,000 रुपए, नोटरी फीस 10 से बढ़ाकर 100 रुपए और सामान्य मुख्तारनामा की फीस 200 से बढ़ाकर 5,000 रुपए करने की बात कही गई है। कुछ अन्य मामलों में 10 और 20 रुपए की फीस बढ़ाकर 500 रुपए की जा रही है।

विपक्ष ने शुल्क बढ़ोतरी का किया विरोध

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि राजस्व बढ़ाने के लिए लोगों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि अधिक शुल्क से संपत्ति संबंधी लेन-देन प्रभावित हो सकते हैं। भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने भी विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि ग्रामीण और गरीब परिवारों को उन कार्यों के लिए अधिक राशि चुकानी पड़ेगी, जिनके लिए पहले मामूली शुल्क लिया जाता था।

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