नशे के अंधेरे से उजाले की ओर लौट रहे युवा, श्री कृष्णा हॉस्पिटल बना नई जिंदगी की उम्मीद
अंबाला के हर्बल पार्क में श्री कृष्णा हॉस्पिटल द्वारा नशा जागरूकता एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने नशे के खतरों, शुरुआती लक्षणों और उपचार की संभावनाओं पर लोगों को जागरूक किया।अस्पताल ने बताया कि सही उपचार और काउंसलिंग से नशे की लत से पूरी तरह छुटकारा संभव है।
अंबाला
बढ़ते नशे के प्रकोप और इसकी चपेट में आ रही युवा पीढ़ी को बचाने के उद्देश्य से श्री कृष्णा हॉस्पिटल द्वारा अंबाला सिटी के हर्बल पार्क में विशेष नशा जागरूकता एवं परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में लोगों को नशे के खतरों, इसके शुरुआती लक्षणों, उपचार की संभावनाओं और नशे की गिरफ्त में आए लोगों की सहायता करने के प्रभावी तरीकों की जानकारी दी गई।कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि नशा केवल एक बुरी आदत नहीं बल्कि एक गंभीर सामाजिक और चिकित्सीय समस्या है, जो व्यक्ति के साथ-साथ पूरे परिवार को प्रभावित करती है। युवाओं में तेजी से फैल रहे नशे के चलन को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों को समय रहते सतर्क रहने का संदेश दिया गया।
श्री कृष्णा हॉस्पिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बी.के. शर्मा ने कहा कि आज नशा समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर उभरा है। अनेक परिवार अपने बच्चों और युवाओं को इस दलदल में फंसता देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशे की लत से जूझ रहे व्यक्ति को अपराधी या असफल इंसान नहीं बल्कि एक मरीज के रूप में देखने की आवश्यकता है। सही उपचार, काउंसलिंग और परिवार के सहयोग से कोई भी व्यक्ति इस स्थिति से बाहर निकल सकता है।डॉ. शर्मा ने कहा कि श्री कृष्णा हॉस्पिटल पिछले कई वर्षों से नशामुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है। हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों लोगों ने यहां उपचार प्राप्त कर न केवल नशे को छोड़ा है बल्कि सामान्य और सम्मानजनक जीवन की ओर वापसी भी की है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य केवल इलाज करना नहीं बल्कि लोगों को नया जीवन और नई दिशा देना है।
अस्पताल के काउंसलर बिट्टू ने कहा कि नशे की शुरुआत अक्सर जिज्ञासा, गलत संगत, तनाव या मानसिक दबाव से होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह व्यक्ति की सोच, व्यवहार और जीवनशैली को पूरी तरह बदल देती है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार शुरुआती संकेतों को पहचान ले तो समय रहते व्यक्ति को बचाया जा सकता है। व्यवहार में अचानक बदलाव, चिड़चिड़ापन, परिवार से दूरी, पढ़ाई या काम में गिरावट, अनियमित दिनचर्या और सामाजिक गतिविधियों से अलगाव जैसे संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अस्पताल के मैनेजर अश्विनी शर्मा ने कहा कि नशा आज पूरे उत्तर भारत के लिए एक गंभीर सामाजिक संकट बनता जा रहा है। युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है और यदि वही नशे की गिरफ्त में चली जाए तो समाज का भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि श्री कृष्णा हॉस्पिटल केवल अस्पताल नहीं बल्कि उन लोगों के लिए उम्मीद का केंद्र बन चुका है जो नशे की बेड़ियों को तोड़कर नई शुरुआत करना चाहते हैं। अस्पताल की विशेषज्ञ टीम आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, मनोवैज्ञानिक परामर्श और पुनर्वास सेवाओं के माध्यम से लगातार लोगों को नशामुक्त जीवन की ओर अग्रसर कर रही है।
शिविर के दौरान उपस्थित लोगों ने भी नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान की सराहना की। अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि समाज, परिवार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सामूहिक प्रयासों से ही नशे के बढ़ते खतरे पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि मदद मांगना कमजोरी नहीं बल्कि बेहतर जीवन की ओर बढ़ाया गया पहला कदम है।हर्बल पार्क में आयोजित यह जागरूकता शिविर न केवल नशे के खिलाफ चेतना का संदेश देकर गया, बल्कि उन लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण भी बना जो नशे की अंधेरी दुनिया से निकलकर फिर से सामान्य जीवन जीना चाहते हैं।
इस जागरूकता शिविर में मुख्य रूप से काउंसलर बिट्टू खुशबू श्याम शर्मा व मैनेजर श्री कृष्णा अस्पताल अश्विनी शर्मा ने मुख्य रूप से हिस्सा लिया.
