NCERT / सोशल मीडिया पर वायरल फर्जी किताबों से रहें सतर्क, केवल आधिकारिक स्रोतों से करें अध्ययन सामग्री डाउनलोड
NCERT : एनसीईआरटी ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को सोशल मीडिया, वेबसाइटों और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रही फर्जी एवं अनधिकृत पुस्तकों से सतर्क रहने की सलाह दी है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि केवल आधिकारिक माध्यमों से जारी पुस्तकों का ही उपयोग करें, जबकि कॉपीराइट सामग्री की अनधिकृत साझेदारी और वितरण पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली
फर्जी और अनधिकृत पुस्तकों को लेकर जारी की सलाह
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को सोशल मीडिया, वेबसाइटों तथा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रही फर्जी और अनधिकृत पुस्तकों से सतर्क रहने की सलाह जारी की है। परिषद ने कहा है कि उसकी पुस्तकें केवल आधिकारिक प्रक्रिया के तहत प्रकाशित और जारी की जाती हैं तथा किसी भी पुस्तक की डिजिटल प्रति आधिकारिक लॉन्च से पहले सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की जाती। एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया कि अनधिकृत स्रोतों से प्राप्त सामग्री पर भरोसा करने से गलत, अधूरी या संशोधित जानकारी मिलने की संभावना रहती है, जिससे अध्ययन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
कक्षा 9 की पुस्तक का अनधिकृत संस्करण मिला
एनसीईआरटी के अनुसार हाल ही में कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक का एक अनधिकृत संस्करण सोशल मीडिया पर प्रसारित होता पाया गया। परिषद ने कहा कि कई वेबसाइटें और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इसे असली एनसीईआरटी पुस्तक बताकर साझा कर रहे हैं, जबकि इस सामग्री का परिषद से कोई संबंध नहीं है। एनसीईआरटी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की सामग्री को आधिकारिक पाठ्यपुस्तक के रूप में प्रस्तुत करना भ्रामक है और इससे विद्यार्थियों तथा शिक्षकों में भ्रम की स्थिति बन सकती है।
केवल आधिकारिक माध्यमों से ही करें डाउनलोड
परिषद ने कहा कि डिजिटल पुस्तकें एनसीईआरटी की आधिकारिक वेबसाइट और ई-पाठशाला (ePathshala) पोर्टल पर निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। मुद्रित प्रतियां केवल अधिकृत विक्रेताओं के माध्यम से ही प्राप्त की जानी चाहिए। छात्रों और शिक्षकों से आग्रह किया गया है कि वे अध्ययन सामग्री केवल आधिकारिक स्रोतों से ही प्राप्त करें और किसी भी सोशल मीडिया लिंक, ऐप, ग्रुप या अनधिकृत वेबसाइट से डाउनलोड की गई सामग्री का उपयोग न करें। परिषद के अनुसार आधिकारिक माध्यमों से प्राप्त सामग्री ही अद्यतन और प्रमाणिक होती है।
भ्रामक सामग्री से पढ़ाई हो सकती है प्रभावित
एनसीईआरटी ने कहा कि सोशल मीडिया पेज, मोबाइल ऐप, वेबसाइट या मैसेजिंग ग्रुप के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही सामग्री अधूरी, संशोधित या गलत हो सकती है। कई मामलों में ऐसी सामग्री में पाठ, चित्र, संदर्भ या अध्यायों में बदलाव किया गया होता है, जिससे विद्यार्थियों की तैयारी प्रभावित हो सकती है। परिषद ने कहा कि परीक्षा की तैयारी, पाठ्यक्रम की समझ और कक्षा शिक्षण के लिए केवल सत्यापित और आधिकारिक सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिए।
कॉपीराइट उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
परिषद ने स्पष्ट किया कि उसकी कॉपीराइट सामग्री की बिना अनुमति छपाई, पुनर्प्रकाशन, वितरण या डिजिटल माध्यम से साझा करना कॉपीराइट अधिनियम, 1957 और अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत दंडनीय है। एनसीईआरटी ने कहा कि फर्जी पुस्तकों और पायरेसी से जुड़े मामलों में संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा रही है। परिषद ने यह भी कहा कि अध्ययन सामग्री के अनधिकृत प्रसार से न केवल संस्थागत नियमों का उल्लंघन होता है, बल्कि विद्यार्थियों को गलत जानकारी मिलने का जोखिम भी बढ़ता है।
कन्नड़ पाठ्यपुस्तक को लेकर भी जारी हुआ स्पष्टीकरण
एनसीईआरटी ने कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक ‘कृष्णा’ को लेकर उठे प्रश्नों पर भी स्पष्टीकरण जारी किया है। परिषद के अनुसार पुस्तक का नाम कर्नाटक की कृष्णा नदी पर आधारित है और इसमें संतुलित आहार संबंधी जानकारी दी गई है। एनसीईआरटी ने कहा कि पुस्तक में किसी विशेष धार्मिक विचारधारा या खानपान पद्धति का समर्थन नहीं किया गया है। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि पाठ्यपुस्तक की सामग्री शैक्षिक उद्देश्य से तैयार की गई है और इसे गलत संदर्भ में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।