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NEET / री-नीट परीक्षा में कथित सॉल्वर नेटवर्क का खुलासा, जांच में कई मेडिकल छात्र आए सामने

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 3 Hours Ago • 1 Min Read

NEET : री-नीट परीक्षा से जुड़े एक मामले में जांच एजेंसियों ने कथित सॉल्वर नेटवर्क की गतिविधियों की जांच शुरू की है। प्रारंभिक जांच में बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया के दुरुपयोग, वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर अन्य व्यक्तियों के परीक्षा में शामिल होने और इससे जुड़े संभावित वित्तीय लेनदेन के आरोप सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पटना

जांच में बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े आरोप

री-नीट परीक्षा से संबंधित जांच में बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोप सामने आए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कुछ परीक्षा केंद्रों पर वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर अन्य व्यक्तियों को बैठाने की व्यवस्था की गई थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में किस स्तर पर अनियमितता हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।जांच में यह भी सामने आया है कि बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन से जुड़े काम में कथित रूप से एक निजी कंपनी और उससे जुड़े कुछ कर्मियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, एनटीए ने री-नीट परीक्षा के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन का कार्य EDCIL को सौंपा था, जिसने आगे यह जिम्मेदारी इनोवेटिव व्यू कंपनी को दी। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि झारखंड और तमिलनाडु सरकार ने वर्ष 2025 में तथा उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 में बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कार्यों के लिए इनोवेटिव व्यू कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया था। अब एजेंसियां कंपनी के नेटवर्क, कार्यप्रणाली और इस मामले में उसकी संभावित भूमिका की जांच कर रही हैं।

लखीसराय से शुरू हुई जांच

मामले की जांच लखीसराय में कुछ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद आगे बढ़ी। जांच एजेंसियों को प्राप्त गोपनीय सूचना और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर कई व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार तकनीकी रिकॉर्ड, परीक्षा केंद्रों से जुड़े दस्तावेज और पहचान सत्यापन से संबंधित पहलुओं का भी परीक्षण किया जा रहा है। जांच का दायरा उन सभी बिंदुओं तक बढ़ाया गया है, जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि कथित व्यवस्था किस स्तर पर और किन लोगों की मदद से संचालित की गई।

बायोमेट्रिक एजेंसियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि परीक्षा के दौरान बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया किस तरह संचालित की गई। अधिकारियों के अनुसार संबंधित एजेंसियों और उनके कुछ कर्मियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है। यह भी जांच का हिस्सा है कि क्या सत्यापन प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुसार हुई या उसमें किसी स्तर पर बदलाव किया गया। फिलहाल सभी तथ्यों का मिलान किया जा रहा है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

गोपनीय सूचना के बाद बढ़ी कार्रवाई

21 जून को बिहार पुलिस मुख्यालय और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को प्राप्त एक गोपनीय सूचना के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया। इसके बाद विभिन्न परीक्षा केंद्रों और संबंधित व्यक्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। जांच के दौरान कुछ अभ्यर्थियों और उनके स्थान पर परीक्षा देने के आरोपों से जुड़े मामलों का भी परीक्षण किया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद उपस्थिति विवरण, परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों को एकत्र कर उनकी समीक्षा की गई।

मेडिकल और अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों के छात्रों के नाम सामने आए

जांच एजेंसियों के अनुसार मामले में कई मेडिकल तथा अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों से जुड़े छात्रों के नाम सामने आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि जिन छात्रों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका किस स्तर तक रही और क्या वे सीधे तौर पर परीक्षा प्रक्रिया में शामिल थे या किसी अन्य व्यवस्था के तहत जुड़े थे।

आर्थिक लेनदेन के आरोपों की भी जांच

मामले की जांच के दौरान कथित आर्थिक लेनदेन से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के लिए किसी प्रकार का वित्तीय लेनदेन हुआ था या नहीं। अधिकारियों के अनुसार यदि लेनदेन से जुड़े साक्ष्य मिलते हैं, तो उन्हें भी जांच रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

जांच जारी, अंतिम निष्कर्ष शेष

पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने मामले में जांच जारी होने की पुष्टि की है। अधिकारियों के अनुसार सभी तकनीकी, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है तथा जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। फिलहाल एजेंसियां उपलब्ध जानकारी, गोपनीय इनपुट और परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं।

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