Loading...

NEET Re-Exam / दिल्ली हाईकोर्ट ने बरकरार रखा टेलीग्राम प्रतिबंध, परीक्षा निष्पक्षता को बताया प्राथमिकता

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 2 Hours Ago • 1 Min Read

NEET Re-Exam : दिल्ली हाईकोर्ट ने नीट (यूजी) 2026 पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता, पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है तथा ऐसी परिस्थितियों में आवश्यक कदम उठाने के लिए उसके पास कानूनी अधिकार उपलब्ध हैं।

नई दिल्ली

हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर सरकार के आदेश को बरकरार रखा

दिल्ली हाईकोर्ट ने टेलीग्राम की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए केंद्र सरकार द्वारा जारी अस्थायी प्रतिबंध आदेश को बरकरार रखा है। जस्टिस तेजस करिया की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि संबंधित आदेश आपात परिस्थितियों में जारी किया गया था और उपलब्ध रिकॉर्ड तथा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर इसे उचित माना जा सकता है। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक हित का विषय है तथा ऐसी परिस्थितियों में सरकार को आवश्यक निवारक और प्रशासनिक कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है। न्यायालय ने यह भी माना कि आदेश सीमित अवधि के लिए लागू किया गया है और इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

परीक्षा सुरक्षा और निष्पक्षता को बताया प्रमुख आधार

अदालत के समक्ष केंद्र सरकार ने कहा कि नीट (यूजी) 2026 पुनर्परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना प्राथमिकता है। सरकार के अनुसार परीक्षा से पहले कुछ टेलीग्राम चैनलों, समूहों और बॉट्स के माध्यम से कथित तौर पर प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने, परीक्षा सामग्री बेचने और अभ्यर्थियों को गुमराह करने जैसी गतिविधियों की जानकारी सामने आई थी। सरकार ने अदालत को बताया कि 3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा के बाद प्रश्न-पत्र लीक होने के आरोपों के चलते 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिए 21 जून को पुनर्परीक्षा आयोजित की जा रही है। ऐसे में परीक्षा से ठीक पहले किसी भी प्रकार की संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि को रोकना आवश्यक माना गया और इसी आधार पर सीमित अवधि के लिए प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया।

सरकार ने टेलीग्राम के तकनीकी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां बताईं

केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि टेलीग्राम के कुछ तकनीकी फीचर्स कानून प्रवर्तन एजेंसियों और जांच संस्थाओं के लिए चुनौतियां उत्पन्न करते हैं। सरकार ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया कि प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध गुमनाम उपयोग की सुविधा, क्लाउड आधारित संरचना, बड़े सार्वजनिक चैनल, ऑटोमेटेड बॉट्स और तेज फॉरवर्डिंग सिस्टम के कारण संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और निगरानी जटिल हो जाती है। सरकार का कहना था कि अवैध सामग्री या किसी विशेष चैनल को हटाने के बाद भी कुछ ही समय में नए चैनल और समूह सक्रिय हो जाते थे, जिससे कार्रवाई का प्रभाव सीमित रह जाता था।

एनटीए और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया कदम

सरकार ने अदालत को बताया कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की सिफारिशों और विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर की गई। अधिकारियों के अनुसार कई ऐसे टेलीग्राम चैनलों, समूहों और बॉट्स की पहचान की गई थी जो कथित रूप से नीट परीक्षा से संबंधित सामग्री बेचने या उपलब्ध कराने के दावे कर रहे थे। सरकार ने कहा कि इन नेटवर्क्स की कुल पहुंच लगभग 1.46 लाख अकाउंट्स तक दर्ज की गई थी। अदालत को यह भी बताया गया कि संबंधित सामग्री हटाने और प्लेटफॉर्म स्तर पर कार्रवाई के लिए कई बार अनुरोध किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत आपातकालीन ब्लॉकिंग आदेश जारी किया गया।

22 जून तक प्रभावी रहेगा अस्थायी प्रतिबंध

हाईकोर्ट के फैसले के बाद टेलीग्राम को तत्काल राहत नहीं मिली है। इसके परिणामस्वरूप 22 जून तक लागू अस्थायी प्रतिबंध प्रभावी रहेगा। इसके अतिरिक्त सरकार के आदेश के अनुसार 30 जून तक प्लेटफॉर्म के मैसेज एडिटिंग फीचर पर भी प्रतिबंध लागू रहेगा। अदालत ने माना कि यह प्रतिबंध स्थायी नहीं है बल्कि एक विशेष परीक्षा और सीमित अवधि से संबंधित है। इसलिए इसे परिस्थितियों के अनुरूप एक अस्थायी प्रशासनिक उपाय माना जा सकता है। मामले से जुड़े अन्य कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर आगे की प्रक्रिया नियमानुसार जारी रह सकती है।

सामान्य उपयोगकर्ताओं पर प्रभाव का मुद्दा भी उठा

टेलीग्राम ने अदालत में तर्क दिया था कि प्रतिबंध का प्रभाव केवल संदिग्ध खातों या चैनलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्लेटफॉर्म का वैध उपयोग करने वाले लाखों सामान्य उपयोगकर्ताओं पर भी पड़ेगा। कंपनी ने कहा कि भारत उसके प्रमुख बाजारों में से एक है और यहां उसके करोड़ों उपयोगकर्ता हैं। हालांकि अदालत ने सरकार के पक्ष को स्वीकार करते हुए कहा कि प्रतिबंध सीमित अवधि के लिए लगाया गया है और इसका सीधा संबंध नीट पुनर्परीक्षा की सुरक्षा से है। न्यायालय ने माना कि उपलब्ध परिस्थितियों में सरकार द्वारा अपनाया गया कदम अनुपातिक और उद्देश्य आधारित है, इसलिए इसे गैर-कानूनी या आवश्यकता से अधिक कठोर नहीं माना जा सकता।

Related Topics: