NEET UG / पेपर लीक मामले में 13 आरोपियों पर चलेगा मुकदमा, फास्ट ट्रैक कोर्ट ने चार्जशीट पर लिया संज्ञान
NEET UG / राउज एवेन्यू स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ाई है। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत में बृहस्पतिवार, 13 अगस्त से आरोपों पर दलीलें शुरू होने की संभावना है। यह अदालत सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए नामित है।
नई दिल्ली
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि मीडिया में प्रकाशित किए जा रहे गवाहों के नामों में कुछ नाबालिग भी हो सकते हैं। एजेंसी के अनुसार, चार्जशीट के कुछ हिस्से लगातार समाचार पत्रों में प्रकाशित हो रहे हैं। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि चार्जशीट की ऐसी बातें सार्वजनिक होना चौंकाने वाला है, जिन्हें अभी अदालत में नहीं रखा गया है। कोर्ट ने जिम्मेदार मीडिया संस्थानों से ऐसी सामग्री प्रकाशित करने से बचने को कहा।
सीबीआई के अनुसार, एनटीए के तीन विषय विशेषज्ञ पेपर लीक के प्रमुख स्रोत थे। इनमें रसायन विज्ञान के पीवी कुलकर्णी, भौतिकी की मनीषा संजय हवालदार और वनस्पति एवं प्राणि विज्ञान की मनीषा गुरुनाथ मांढरे शामिल हैं। जांच एजेंसी ने इन आरोपों और मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों का विवरण अपनी चार्जशीट में अदालत के सामने रखा है। सभी आरोपियों के विरुद्ध आरोप तय करने से पहले अदालत में पक्षों की दलीलें सुनी जानी हैं।
राजस्थान से शुरू हुई गिरफ्तारी की कार्रवाई
सीबीआई ने 13 मई को राजस्थान में मंगीलाल, दिनेश और विकास बिवल को गिरफ्तार किया था। एजेंसी के मुताबिक, उनके मोबाइल से 29 अप्रैल को टेलीग्राम के माध्यम से भेजी गई लीक प्रश्नपत्र की पीडीएफ मिलने की बात सामने आई। उसी दिन गुरुग्राम के यश यादव, नासिक के शुभम खैरनार और पुणे के धनंजय लोखंडे को भी गिरफ्तार किया गया। लोखंडे पर साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से मोबाइल नष्ट करने की कोशिश करने का आरोप है।
इसके बाद 14 मई को पुणे से मनीषा संजय वाघमारे को गिरफ्तार किया गया। चार्जशीट के अनुसार, उन पर आर्थिक लाभ के लिए पेपर लीक और उसके प्रसार की साजिश में भूमिका निभाने का आरोप है। सीबीआई ने उन्हें उम्मीदवारों और विषय विशेषज्ञों के बीच की कड़ी बताया है। पूछताछ के बाद 15 मई को लातूर से कथित मास्टरमाइंड पीवी कुलकर्णी, 16 मई को पुणे से मनीषा मांढरे और 17 मई को लातूर के एक कोचिंग सेंटर के संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार किया गया।
जांच एजेंसी ने 22 मई को मनीषा संजय हवालदार और 26 मई को तेजस शाह तथा डॉ. मनोज शिरुरे को गिरफ्तार किया। सीबीआई का दावा है कि जब्त मोबाइल उपकरणों की फॉरेंसिक इमेजिंग के दौरान डिलीट किए गए व्हाट्सएप चैट और लीक प्रश्नों वाली पीडीएफ बरामद हुईं। एजेंसी ने जब्त किए गए डिजिटल एवं संचार उपकरणों के साथ दस्तावेजों का भी फॉरेंसिक विश्लेषण कराया है।
चार्जशीट में 360 गवाह और 422 दस्तावेज
सीबीआई ने चार्जशीट में 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक वस्तुओं को साक्ष्य के रूप में शामिल किया है। उच्च शिक्षा विभाग की 12 मई की लिखित शिकायत पर उसी दिन प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के लिए 72 अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीमें गठित की गईं। महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी कर डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की गई थी।