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NITI Ayog / नीति आयोग की बैठक में हिमाचल के वित्तीय मुद्दे उठाए, मुख्यमंत्री सुक्खू ने विशेष पैकेज की मांग की

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

NITI Ayog : नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल बैठक में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश से जुड़े विभिन्न वित्तीय और विकासात्मक विषयों को केंद्र सरकार के समक्ष रखा। उन्होंने राज्य के लिए विशेष पैकेज, उच्च स्तरीय समिति के गठन तथा बुनियादी ढांचे और पर्यटन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।

शिमला

नीति आयोग की बैठक में रखा प्रदेश का पक्ष

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में भाग लिया। बैठक का विषय ‘विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ था। बैठक में राज्यों के सामाजिक-आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार, मानव संसाधन विकास और क्षेत्रीय आवश्यकताओं से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश से संबंधित वित्तीय, ऊर्जा, पर्यटन और आपदा प्रबंधन के मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष रखा।

वित्तीय चुनौतियों पर समिति गठन का आग्रह

मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के समक्ष मौजूद वित्तीय चुनौतियों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार से एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि समिति राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान, जलविद्युत परियोजनाओं से संबंधित विषयों तथा जीएसटी व्यवस्था से जुड़े राजस्व प्रभाव का आकलन कर सकती है। मुख्यमंत्री के अनुसार समिति की रिपोर्ट के आधार पर राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जा सकेगा।

विशेष पैकेज की मांग रखी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान समाप्त होने के बाद राज्य की वित्तीय स्थिति प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि राज्य को पूर्व में 25,000 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई थी, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस राशि को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने विकास परियोजनाओं, आधारभूत संरचना और सार्वजनिक सेवाओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहयोग का अनुरोध किया।

मुफ्त बिजली और बीबीएमबी बकाया का मुद्दा उठाया

बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 13,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन क्षमता है, लेकिन राज्य को मुफ्त बिजली का अपेक्षित हिस्सा प्राप्त नहीं हो रहा है। उन्होंने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से संबंधित लगभग 7,000 करोड़ रुपये की बकाया राशि का विषय भी केंद्र सरकार के समक्ष रखा और इसके समाधान की आवश्यकता बताई।

प्राकृतिक आपदाओं और जीएसटी राजस्व पर चर्चा

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण राज्य को लगातार आर्थिक प्रभाव झेलना पड़ता है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि अभी प्राप्त नहीं हुई है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद पिछले आठ वर्षों में राज्य को लगभग 25,000 करोड़ रुपये के राजस्व प्रभाव का सामना करना पड़ा है, जिसे ध्यान में रखते हुए विशेष वित्तीय सहयोग पर विचार किया जाना चाहिए।

पर्यटन क्षेत्र के लिए बेहतर हवाई संपर्क की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हवाई संपर्क मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने गगल हवाई अड्डे के विस्तार और विकास का विषय उठाते हुए हिमाचल प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बेहतर हवाई संपर्क से पर्यटन गतिविधियों, निवेश और स्थानीय रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।

नशा निरोधक अभियान पर भी हुई चर्चा

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा नशा निरोधक गतिविधियों के तहत किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने खुफिया तंत्र को मजबूत बनाने तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि अंतरराज्यीय स्तर पर सूचना साझा करने और समन्वित कार्रवाई से नशा तस्करी की रोकथाम के प्रयासों को और प्रभावी बनाया जा सकता है।

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