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पंचायत आरक्षण पर हाई कोर्ट की बड़ी रोक, डीसी का 5 फीसदी विशेष कोटा फिलहाल बेअसर

PRIYANKA THAKUR • 7 Apr 2026 • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों से पहले आरक्षण प्रक्रिया पर हाई कोर्ट ने बड़ा दखल दिया है। अदालत ने जिलाधीशों को भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर पांच फीसदी सीटों के आरक्षण में बदलाव करने के लिए दी गई शक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है।अदालत ने ऐसे सभी प्रभावित क्षेत्रों का संशोधित रोस्टर सात अप्रैल शाम पांच बजे तक जारी करने के निर्देश दिए हैं।

शिमला

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों से पहले आरक्षण प्रक्रिया पर हाई कोर्ट ने बड़ा दखल दिया है। अदालत ने जिलाधीशों को भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर पांच फीसदी सीटों के आरक्षण में बदलाव करने के लिए दी गई शक्तियों पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जिन जिलों में इस शक्ति का इस्तेमाल करते हुए आरक्षण रोस्टर जारी किया गया है, वह भी फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगा।हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान प्रथम दृष्टया माना कि सरकार द्वारा जिलाधीशों को दी गई यह शक्ति संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं दिखती। अदालत ने साफ कहा कि यदि किसी जिले में इस विशेष प्रावधान के तहत पंचायत, बीडीसी या जिला परिषद के लिए आरक्षण तय किया गया है, तो उस पर रोक मानी जाएगी।

मामले में सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य की अधिकांश पंचायती राज संस्थाओं का आरक्षण रोस्टर पहले ही जारी किया जा चुका है। सरकार का पक्ष था कि चुनाव नियम बनाने के अधिकार के तहत यह व्यवस्था लागू की गई थी और उसी के आधार पर जिलाधीशों को यह शक्ति दी गई।दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि संविधान में भौगोलिक आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में जिलाधीशों को इस तरह की छूट देना कानून और संवैधानिक ढांचे के खिलाफ है। अदालत ने प्रारंभिक तौर पर इन दलीलों को स्वीकारते हुए सरकार की 30 मार्च की अधिसूचना पर रोक लगा दी।

कोर्ट के आदेश के बाद अब केवल उन्हीं क्षेत्रों में नया आरक्षण रोस्टर जारी किया जाएगा, जहां डीसी स्तर पर इस विशेष पांच फीसदी प्रावधान का इस्तेमाल किया गया था। अदालत ने ऐसे सभी प्रभावित क्षेत्रों का संशोधित रोस्टर सात अप्रैल शाम पांच बजे तक जारी करने के निर्देश दिए हैं।यह मामला शिमला जिले की ठियोग तहसील स्थित ग्राम पंचायत घोड़ना के पूर्व प्रधान विकेश जिंटा और अन्य की ओर से दायर याचिका के बाद सामने आया। याचिका में सरकार द्वारा जिलाधीशों को दी गई इस शक्ति को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी गई थी।

अब इस आदेश के बाद पंचायत चुनावों की प्रशासनिक तैयारियों में नई हलचल शुरू हो गई है। जिन जिलों में आरक्षण रोस्टर इस विशेष प्रावधान के तहत बदला गया था, वहां अब दोबारा प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी। इससे चुनावी तैयारियों और स्थानीय सियासी समीकरणों पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा ।