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“वोट डाल सकती हैं तो चुनाव क्यों नहीं लड़ सकतीं?” : कर्ण नंदा

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

पंचायतीराज चुनावों से पहले भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को चुनाव लड़ने से रोकने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के आरोप लगाए हैं। भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने प्रेस वार्ता में कहा कि सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन महिला अधिकारों और संवैधानिक प्रक्रिया के खिलाफ है।

शिमला

पंचायतीराज चुनावों से पहले हिमाचल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने कांग्रेस सरकार पर अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को चुनावी मैदान से बाहर करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कर्ण नंदा ने कहा कि कांग्रेस सरकार “नोटिफिकेशन की आड़ में लोकतंत्र का गला घोंटने” का काम कर रही है।

कर्ण नंदा ने कहा कि पंचायतीराज चुनावों की प्रक्रिया 29 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद 8 मई को एक ऐसा नोटिफिकेशन जारी किया गया जिसने चुनावी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए। भाजपा का आरोप है कि इस नोटिफिकेशन के जरिए उन अनुसूचित जाति महिलाओं को चुनाव लड़ने से रोका जा रहा है, जिनका विवाह हिमाचल से बाहर हुआ है, भले ही वे अपनी ही अनुसूचित जाति श्रेणी में विवाहित हों।

उन्होंने इस फैसले को “महिला विरोधी, दलित विरोधी और संविधान विरोधी” बताते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार एक तरफ महिलाओं के अधिकारों की बात करती है, जबकि दूसरी ओर चुनाव आते ही उनके संवैधानिक अधिकार छीनने का प्रयास कर रही है।प्रेस वार्ता में कर्ण नंदा ने सिरमौर जिले के नाहन क्षेत्र की अनुरानी का मामला भी उठाया। उन्होंने बताया कि अनुरानी की शादी वर्ष 2009-10 में हरियाणा के यमुनानगर से काला अंब स्थित वाल्मीकि परिवार में हुई थी। उनके पास हिमाचल प्रदेश का बोनाफाइड प्रमाण पत्र और मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद उनका नामांकन रद्द कर दिया गया। नंदा ने सवाल उठाया कि “जब एक महिला वोट डाल सकती है, तो फिर चुनाव क्यों नहीं लड़ सकती?”

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल कर अपने “चहेते उम्मीदवारों” को फायदा पहुंचाने और विपक्ष समर्थित उम्मीदवारों को रोकने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक महिला का नहीं, बल्कि प्रदेशभर की महिलाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा है।कर्ण नंदा ने कहा कि भाजपा ने इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। हालांकि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के कारण न्यायालय ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, लेकिन भाजपा इस मुद्दे को बड़ी पीठ में उठाएगी और कानूनी लड़ाई जारी रखेगी।

उन्होंने कांग्रेस सरकार से सवाल किया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद ऐसा नोटिफिकेशन क्यों जारी किया गया। साथ ही पूछा कि मतदाता सूची में नाम और बोनाफाइड प्रमाण पत्र होने के बावजूद महिला को चुनाव लड़ने से कैसे रोका जा सकता है।कर्ण नंदा ने कहा कि कांग्रेस सरकार महिलाओं को आर्थिक सहायता के वादे तो करती है, लेकिन वास्तविकता में उन्हें लोकतंत्र से बाहर करने का काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता अब कांग्रेस सरकार की “असलियत” समझ चुकी है और आने वाले पंचायतीराज चुनावों में इसका जवाब देगी।

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