POCSO मामले के आरोपी को NEET पुनर्परीक्षा में शामिल होने हेतु चार दिन की अंतरिम जमानत मिली
NEET UG Re-Exam में शामिल होने के लिए POCSO मामले के आरोपी को चार दिन की अंतरिम जमानत मिली है। विशेष अदालत ने पीड़िता पक्ष की आपत्ति न होने और निर्धारित शर्तों के पालन के आधार पर आरोपी को 21 जून तक राहत प्रदान की है।अदालत ने आरोपी को परीक्षा में शामिल होने के बाद 22 जून को जांच अधिकारी के समक्ष आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पीड़िता या उसके परिवार से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं करने की शर्त भी लगाई गई है।
मुंबई
अदालत ने दी सीमित अवधि की राहत
मुंबई की विशेष POCSO अदालत ने 18 वर्षीय आरोपी को NEET UG पुनर्परीक्षा में शामिल होने के लिए 18 जून से 21 जून तक चार दिन की अंतरिम जमानत प्रदान की है। अदालत ने यह राहत 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत पर मंजूर की। सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी की परीक्षा में शामिल होने की आवश्यकता और मामले से जुड़े तथ्यों पर विचार किया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि यह राहत केवल निर्धारित अवधि और परीक्षा में भागीदारी के उद्देश्य तक सीमित रहेगी।
शर्तों के साथ मंजूर हुई जमानत
विशेष न्यायाधीश एस.आर. शर्मा ने जमानत देते हुए कई शर्तें निर्धारित की हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि आरोपी किसी भी परिस्थिति में पीड़िता या उसके परिवार के सदस्यों से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क नहीं करेगा। इसके अलावा आरोपी को अदालत और जांच एजेंसी द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पालन करना होगा। आदेश में यह भी कहा गया कि परीक्षा में शामिल होने के बाद आरोपी को अपनी उपस्थिति से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।
22 जून तक करना होगा आत्मसमर्पण
अदालत के आदेश के अनुसार आरोपी को 22 जून को दोपहर 2 बजे से पहले संबंधित जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर आत्मसमर्पण करना होगा। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद आरोपी को निर्धारित समयसीमा के भीतर अधिकारियों के समक्ष पेश होना अनिवार्य होगा। साथ ही उसे NEET UG पुनर्परीक्षा में शामिल होने के प्रमाण भी उपलब्ध कराने होंगे, ताकि अदालत द्वारा दी गई राहत के उद्देश्य की पुष्टि की जा सके।
अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा है और उसे परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि परीक्षा की तैयारी और उसमें भागीदारी के लिए सीमित अवधि की राहत आवश्यक है। दूसरी ओर विशेष लोक अभियोजक ने मामले की प्रकृति और आरोपों का उल्लेख करते हुए अंतरिम जमानत का विरोध किया। अभियोजन पक्ष ने सुझाव दिया कि आरोपी को केवल परीक्षा देने के लिए पुलिस निगरानी में अनुमति दी जा सकती है। हालांकि अदालत ने निर्धारित शर्तों के साथ सीमित अवधि की जमानत को उपयुक्त माना।
POCSO और BNS के तहत दर्ज है मामला
आरोपी के विरुद्ध एक नाबालिग से जुड़े मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत मामला दर्ज है। मामले की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है। आरोपी नवी मुंबई स्थित तलोजा केंद्रीय कारागार में न्यायिक हिरासत में था। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अंतरिम जमानत केवल परीक्षा में शामिल होने के उद्देश्य से दी गई है और मामले की नियमित कानूनी प्रक्रिया पूर्ववत जारी रहेगी।