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POCSO / धर्मशाला पॉक्सो कोर्ट का फैसला, नाबालिग से अनुचित हरकत मामले में आरोपी को तीन वर्ष कारावास

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

POCSO : धर्मशाला स्थित फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग से अनुचित हरकत करने के मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है तथा अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर फैसला सुनाया गया।

धर्मशाला

पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया फैसला

धर्मशाला स्थित फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने नाबालिग से संबंधित एक मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय लक्ष्मी की अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और जांच रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने दोषी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। न्यायालय के आदेश के अनुसार यदि जुर्माना निर्धारित अवधि में जमा नहीं किया जाता है तो दोषी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

नवंबर 2023 का है मामला

अभियोजन पक्ष के अनुसार यह मामला 20 नवंबर 2023 का है। शिकायत के मुताबिक देहरा उपमंडल की एक नाबालिग छात्रा प्रतिदिन की तरह स्कूल जा रही थी। इसी दौरान गांव के एक रिश्तेदार, जो पीड़िता का चाचा लगता था, ने उसे अपनी दुकान पर बुलाया। आरोप है कि आरोपी ने छात्रा को स्कूल छोड़ने की बात कहकर अपने वाहन में बैठा लिया। इसके बाद वह उसे निर्धारित मार्ग से हटाकर एक अन्य स्थान पर ले गया, जहां उसके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि घटना के बाद आरोपी ने छात्रा को किसी को जानकारी न देने के लिए धमकी दी थी।

शिकायत के बाद दर्ज हुआ मामला

घटना के संबंध में नाबालिग ने अपने परिजनों को जानकारी दी, जिसके बाद मामले की शिकायत पुलिस के समक्ष दर्ज करवाई गई। शिकायत मिलने पर पुलिस ने संबंधित धाराओं और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से जुड़े तथ्यों का सत्यापन किया, संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए और अन्य आवश्यक साक्ष्य एकत्रित किए। जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया गया, जिसके आधार पर मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई।

21 गवाहों के बयान हुए दर्ज

अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान कुल 21 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिनमें जांच अधिकारी सहित अन्य संबंधित गवाह शामिल थे। अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष घटनाक्रम, जांच प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों का विवरण रखा। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री का परीक्षण करने के बाद आरोपी के विरुद्ध आरोपों को सिद्ध माना।

अदालत ने सुनाई सजा

मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जुर्माना जमा न करने की स्थिति में दोषी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। अदालत के फैसले के साथ इस मामले की सुनवाई प्रक्रिया पूर्ण हो गई है।

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