POCSO / कांगड़ा में पोक्सो मामले में पूर्व पंचायत प्रधान को तीन वर्ष कारावास, दूसरे आरोपी को भी सजा
POCSO : कांगड़ा जिले में नाबालिग से छेड़छाड़ और धमकी देने से जुड़े मामले में विशेष पोक्सो न्यायालय ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। अदालत ने मुख्य आरोपी को तीन वर्ष के कारावास और जुर्माने तथा सह-आरोपी को कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया है।
धर्मशाला
विशेष पोक्सो न्यायालय ने सुनाया फैसला
धर्मशाला स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं विशेष पोक्सो न्यायालय की न्यायाधीश विजय लक्ष्मी की अदालत ने नाबालिग बालिका से छेड़छाड़ और धमकी देने से जुड़े मामले में तत्कालीन ग्राम पंचायत प्रधान विजय कुमार को दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी को पोक्सो अधिनियम की धारा 8 के तहत तीन वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि निर्धारित जुर्माना राशि जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और जांच रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया, जिसके आधार पर अदालत ने दोषसिद्धि का निर्णय सुनाया।
बीएनएस की धारा के तहत भी दंडित
अदालत ने आरोपी विजय कुमार को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351 के तहत भी दोषी पाया है। इस धारा के अंतर्गत आरोपी को एक वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। न्यायालय के आदेशानुसार यदि आरोपी निर्धारित जुर्माना राशि जमा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त 15 दिन का कारावास भुगतना होगा। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को ध्यान में रखते हुए दोनों धाराओं के तहत अलग-अलग दंड निर्धारित किए हैं।
सह-आरोपी को भी सुनाई गई सजा
मामले में सह-आरोपी और विजय कुमार की पत्नी को भी दोषी ठहराया गया है। अदालत ने उसे एक दिन के कारावास तथा पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि यदि वह निर्धारित जुर्माना राशि जमा नहीं करती है तो उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार सह-आरोपी के विरुद्ध भी मामले से संबंधित आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे, जिनके आधार पर अदालत ने दोषसिद्धि दर्ज की।
वर्ष 2025 में दर्ज हुई थी शिकायत
अभियोजन पक्ष के अनुसार 16 जून 2025 को पीड़िता की माता ने हेल्पलाइन नंबर 112 पर शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत मिलने के बाद महिला पुलिस कर्मी पीड़िता के घर पहुंची और मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पीड़िता के बयान दर्ज किए गए तथा अन्य आवश्यक साक्ष्य एकत्र किए गए। शिकायत में बताया गया था कि 14 जून 2025 को पीड़िता मकान निर्माण से संबंधित आवेदन लिखवाने के उद्देश्य से तत्कालीन पंचायत प्रधान के घर गई थी। पुलिस ने शिकायत और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की।
अभियोजन पक्ष ने पेश किए 12 गवाह
मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से उप जिला न्यायवादी नवीना राही ने अदालत में कुल 12 गवाह प्रस्तुत किए। अभियोजन पक्ष ने जांच अधिकारी, संबंधित पुलिस कर्मियों तथा अन्य गवाहों के बयान अदालत के समक्ष रखे। गवाहों के बयानों, दस्तावेजी साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर अभियोजन पक्ष ने आरोपों का समर्थन किया। मामले में नायब कोर्ट यशपाल ने भी अभियोजन पक्ष की ओर से आवश्यक न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग किया।
न्यायालय ने सुनाया निर्णय
विशेष पोक्सो न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों, जांच रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद निर्णय सुनाया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को सिद्ध करने में सफल रहा है। इसके आधार पर न्यायालय ने मुख्य आरोपी विजय कुमार तथा सह-आरोपी को दोषी ठहराते हुए संबंधित धाराओं के तहत कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।