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POCSO: शिमला के दुष्कर्म मामले में पति और सास-ससुर बरी, नाबालिग उम्र साबित नहीं

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 9 Sep 2026 • 1 Min Read

POCSO: शिमला की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले में आरोपी पति तथा उसके माता-पिता को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत में अभियोजन पक्ष घटना के समय पीड़िता के नाबालिग होने का तथ्य साबित नहीं कर सका। सुनवाई के दौरान पीड़िता भी अपने पहले के बयानों से मुकर गई और उसने बालिग होने के बाद अपनी इच्छा से आरोपी से शादी करने की बात कही।

शिमला

फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पॉक्सो/दुष्कर्म) शिमला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने मामले में फैसला सुनाया। ढली थाना में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार राजगढ़, सिरमौर निवासी आरोपी पर वर्ष 2023 में नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगाने और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने का आरोप था। इसके बाद पीड़िता ने एक बच्ची को जन्म दिया था। आरोपी के माता-पिता पर पीड़िता को धमकाने और अपने बेटे का सहयोग करने के आरोप लगाए गए थे।

पीड़िता ने अदालत में क्या कहा

मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत को बताया कि उसका जन्म 17 नवंबर 2004 को हुआ था। उसके अनुसार उसने बालिग होने के बाद वर्ष 2024 में अपनी इच्छा से आरोपी से शादी की थी। पीड़िता ने यह भी कहा कि दोनों परिवारों के बीच विवाद होने के कारण वह अपने मायके चली गई थी, लेकिन अब वह अपने पति के साथ खुशी से रह रही है। अदालत के सामने पीड़िता की घटना के समय उम्र मामले का प्रमुख सवाल रही और अभियोजन उसके नाबालिग होने का बुनियादी तथ्य सिद्ध नहीं कर पाया।

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