हिमाचल के प्रो. प्रेमलाल गौतम को पद्मश्री सम्मान, कृषि विज्ञान क्षेत्र में योगदान के लिए राष्ट्रपति ने किया सम्मानित
बिलासपुर जिले के बरठीं क्षेत्र के कंडयाना गांव के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक प्रो. प्रेमलाल गौतम को कृषि विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। प्रो. गौतम ने कृषि अनुसंधान, उन्नत बीज विकास और किसानों तक वैज्ञानिक तकनीक पहुंचाने में महत्वपूर्ण कार्य किया है।
बिलासपुर
राष्ट्रपति भवन में मिला पद्मश्री सम्मान
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के बरठीं क्षेत्र के कंडयाना गांव से संबंध रखने वाले वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक प्रो. प्रेमलाल गौतम को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें कृषि विज्ञान के क्षेत्र में उनके लंबे और उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया। 78 वर्षीय प्रो. गौतम ने अपने वैज्ञानिक और शैक्षणिक कार्यकाल में कृषि अनुसंधान, बीज विकास, जैव विविधता संरक्षण और कृषि संस्थानों के सशक्तीकरण से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कृषि अनुसंधान और बीज विकास में योगदान
प्रो. गौतम ने अपने कार्यकाल के दौरान कृषि अनुसंधान को व्यावहारिक स्तर तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया। पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में सेवाकाल के दौरान उन्होंने कई उन्नत फसल किस्मों के विकास में योगदान दिया, जिनकी विशेषता अधिक उत्पादन, बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता रही। इन किस्मों के उपयोग से किसानों को उत्पादन बढ़ाने और आय में सुधार करने में सहायता मिली। उनके शोध कार्यों का लाभ देश के विभिन्न हिस्सों में किसानों तक पहुंचा।
किसानों तक पहुंचाई वैज्ञानिक खेती की तकनीकें
प्रो. गौतम ने कृषि तकनीकों को केवल शोध संस्थानों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें किसानों तक पहुंचाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों, फील्ड डेमो और विस्तार गतिविधियों का उपयोग किया। उन्होंने वैज्ञानिक खेती की पद्धतियों को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया और आधुनिक कृषि तकनीकों के व्यवहारिक उपयोग पर जोर दिया। उनके प्रयासों से कृषि अनुसंधान और खेत स्तर की जरूरतों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिली।
जैव विविधता संरक्षण में निभाई भूमिका
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज के निदेशक के रूप में प्रो. गौतम ने दुर्लभ और विलुप्तप्राय फसल प्रजातियों के संरक्षण से जुड़े कार्यों का नेतृत्व किया। पौध आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन में उनकी भूमिका को कृषि जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। उनके कार्यों से देश की खाद्य सुरक्षा और भविष्य की कृषि आवश्यकताओं के लिए संसाधनों के संरक्षण को मजबूती मिली।
कई संस्थानों में संभाली महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
प्रो. गौतम ने अपने करियर में कृषि विश्वविद्यालय सोलन में डीन, पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर और आईसीएआर में विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के पदों पर सेवाएं दीं। इन जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार सेवाओं को दिशा देने का कार्य किया। उन्होंने सैकड़ों कृषि वैज्ञानिकों और शोधार्थियों का मार्गदर्शन भी किया, जिससे नई पीढ़ी के शोधकर्ताओं को अकादमिक और व्यावहारिक स्तर पर लाभ मिला।
क्षेत्र और राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद बिलासपुर जिले के कंडयाना गांव सहित प्रदेश के कृषि और शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इसे प्रो. गौतम के लंबे वैज्ञानिक योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता बताया है। यह सम्मान उनके दशकों लंबे शोध, शिक्षण और संस्थागत कार्यों का परिणाम माना जा रहा है। उनके सम्मानित होने से हिमाचल प्रदेश के कृषि क्षेत्र से जुड़े कार्यों को भी राष्ट्रीय पहचान मिली है।