RE-NEET / परीक्षा सुरक्षा उपायों के तहत टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध, जानिए क्या है कारण
RE-NEET : देश में RE-NEET परीक्षा से पहले परीक्षा प्रक्रिया की सुरक्षा और फर्जी सामग्री के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लागू किया गया है। अधिकारियों के अनुसार यह कदम परीक्षा से संबंधित भ्रामक दावों, फर्जी प्रश्नपत्रों और साइबर धोखाधड़ी के मामलों पर नियंत्रण के लिए उठाया गया है।
नई दिल्ली
RE-NEET परीक्षा से पहले लागू किया गया अस्थायी प्रतिबंध
केंद्र सरकार ने RE-NEET परीक्षा के मद्देनजर टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध लागू किया है, जो 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। रिपोर्टों के अनुसार यह निर्णय राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सिफारिशों के आधार पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा से पहले फर्जी प्रश्नपत्र, भ्रामक दावे, अवैध सामग्री और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की आशंकाओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता बनाए रखना, अभ्यर्थियों को भ्रामक सूचनाओं से बचाना और परीक्षा संचालन को सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाए रखना है।
टेलीग्राम पर निगरानी की आवश्यकता क्यों महसूस हुई
जांच एजेंसियों और साइबर सुरक्षा इकाइयों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े फर्जी पेपर, कथित पेपर लीक दावे और ऑनलाइन ठगी के मामलों में टेलीग्राम चैनलों और समूहों का उपयोग होने की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे मामलों में अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा कर धनराशि मांगी जाती है। कई बार फर्जी दस्तावेजों और भ्रामक संदेशों को आधिकारिक जानकारी बताकर प्रसारित किया जाता है। अधिकारियों का मानना है कि परीक्षा से ठीक पहले बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों तक पहुंच रखने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अतिरिक्त निगरानी आवश्यक होती है, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रामक गतिविधि को रोका जा सके।
प्लेटफॉर्म की तकनीकी विशेषताओं पर भी ध्यान
टेलीग्राम की कुछ तकनीकी विशेषताएं इसे बड़े पैमाने पर सूचना प्रसार के लिए सक्षम बनाती हैं। एक टेलीग्राम समूह में अधिकतम दो लाख प्रतिभागियों को जोड़ा जा सकता है, जबकि चैनलों के माध्यम से संदेश लाखों उपयोगकर्ताओं तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा सीक्रेट चैट, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और ओपन बॉट एपीआई जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन सुविधाओं का उपयोग सामान्य संचार और वैध उद्देश्यों के लिए किया जाता है, लेकिन कुछ मामलों में इन्हीं माध्यमों का उपयोग फर्जी लिंक साझा करने, नकली ग्राहक सहायता सेवाएं चलाने, फिशिंग प्रयासों और भ्रामक प्रचार सामग्री फैलाने के लिए भी किया गया है। इसी कारण परीक्षा अवधि के दौरान प्लेटफॉर्म पर विशेष ध्यान दिया गया है।
RE-NEET परीक्षा और सुरक्षा प्रबंध
RE-NEET परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। परीक्षा को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर सुरक्षा प्रबंधों को मजबूत किया गया है। परीक्षा केंद्रों की निगरानी, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नजर, साइबर सुरक्षा इकाइयों की सक्रियता तथा संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की जांच जैसे कदम उठाए गए हैं। अधिकारियों ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे केवल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और अन्य अधिकृत सरकारी स्रोतों से जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। किसी भी अनधिकृत वेबसाइट, सोशल मीडिया पोस्ट या निजी चैनल के माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी या परीक्षा सामग्री संबंधी दावों से सावधानी बरतने को कहा गया है।
फर्जी रैकेट के मामलों ने बढ़ाई सतर्कता
हाल के महीनों में विभिन्न राज्यों में ऐसे मामलों का खुलासा हुआ है जिनमें प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से धनराशि वसूलने का प्रयास किया गया। उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष कार्यबल (STF) ने भी एक ऐसे मामले में कार्रवाई की थी, जिसमें टेलीग्राम पर कथित रूप से परीक्षा सामग्री उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार ऐसे मामलों में अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और उत्तर उपलब्ध कराने का प्रलोभन देकर आर्थिक धोखाधड़ी की जाती है। अधिकारियों ने कहा है कि किसी भी संदिग्ध लिंक, भुगतान मांगने वाले संदेश या परीक्षा सामग्री उपलब्ध कराने के दावों की सूचना तत्काल संबंधित एजेंसियों को दी जानी चाहिए, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।