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रेणुका वन विश्राम गृह के टेंडर पर बवाल, स्थानीय ठेकेदारों को बाहर रखने के आरोप

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 48 Mins Ago • 1 Min Read

रेणुका जी स्थित वन विश्राम गृह की हाउसकीपिंग और कैटरिंग सेवाओं के लिए जारी लिमिटेड टेंडर की पात्रता शर्तों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने टेंडर प्रक्रिया में स्थानीय ठेकेदारों और व्यवसायियों को अवसर नहीं दिए जाने का आरोप लगाया है। वहीं वन विभाग का कहना है कि पहली प्रक्रिया में आवेदन नहीं मिलने पर ओपन टेंडर जारी किया जाएगा।

नाहन/रेणुका जी

रेणुका जी स्थित वन विभाग के वन विश्राम गृह में हाउसकीपिंग और कैटरिंग सेवाओं के लिए जारी लिमिटेड टेंडर विवादों में घिर गया है। टेंडर की पात्रता शर्तों को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इसमें क्षेत्र के स्थानीय ठेकेदारों और कैटरिंग व्यवसायियों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।वन विभाग की ओर से जारी टेंडर दस्तावेज के अनुसार निविदा केवल जेएफएमसी (संयुक्त वन प्रबंधन समिति), वीएफडीएस, महिला मंडलों, युवक मंडलों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए आमंत्रित की गई है। इसी शर्त को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है।

स्थानीय निवासी कल्याण सिंह ठाकुर सहित अन्य लोगों का कहना है कि रेणुका क्षेत्र में वर्षों से होटल, कैटरिंग और आतिथ्य सेवाओं से जुड़े कई स्थानीय व्यवसायी कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर नहीं दिया गया। उनका कहना है कि यदि सेवाएं हाउसकीपिंग और कैटरिंग से संबंधित हैं तो स्थानीय पंजीकृत ठेकेदारों को भी समान अवसर मिलना चाहिए, ताकि प्रतिस्पर्धा के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार का लाभ भी मिल सके।

डीएफओ ने क्या कहा?

मामले पर डीएफओ वाइल्डलाइफ डॉ. शहनवाज ने बताया कि टेंडर की पात्रता संबंधी शर्तें स्थानीय स्तर पर तय नहीं की गई हैं, बल्कि उच्च स्तर से निर्धारित की गई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल पहली चरण की प्रक्रिया निर्धारित श्रेणियों के लिए रखी गई है। यदि इस प्रक्रिया में कोई भी पात्र संस्था टेंडर में भाग नहीं लेती है तो विभाग इसके बाद ओपन टेंडर जारी करेगा, जिसमें अन्य इच्छुक पक्ष भी आवेदन कर सकेंगे।फिलहाल टेंडर की शर्तों को लेकर स्थानीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पहली चरण की निविदा प्रक्रिया में कितनी संस्थाएं भाग लेती हैं और क्या इसके बाद विभाग ओपन टेंडर जारी करता है।