उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए संभल में 1978 में हुए सांप्रदायिक दंगों की जांच के आदेश दिए हैं। इस दंगे की घटना 46 साल पहले हुई थी, और अब योगी सरकार ने इस पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर सदन में भी चर्चा की और बताया कि सरकार इस मामले में पूरी निष्पक्षता से जांच कराएगी।
योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला
योगी सरकार के इस फैसले से दंगा पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीदें जग गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1978 के संभल दंगे को लेकर विधानसभा में कहा था कि इस घटना में कथित रूप से 184 लोग मारे गए थे और कई लोगों के घरों को नुकसान हुआ था। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मृतकों की संख्या 24 थी। इस पर चर्चा के बाद, विधान परिषद के सदस्य श्रीचंद्र शर्मा ने शासन से मामले की जांच करने की मांग की थी। अब इस आदेश के बाद, जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी।
गृह विभाग ने जारी किया आदेश
गृह विभाग के उप सचिव और मानवाधिकार आयोग के एसपी ने संभल प्रशासन को पत्र भेजकर एक हफ्ते के अंदर आख्या (रिपोर्ट) जमा करने को कहा है। साथ ही, जांच के लिए संभल के ASP उत्तरी को नियुक्त किया गया है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि जांच अधिकारी एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजेंगे।
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46 साल बाद शुरू हुई जांच प्रक्रिया
1978 के दंगे के बारे में जांच का आदेश 46 साल बाद आया है। यह घटना संभल के नखासा इलाके में हुई थी, जहाँ 25 हिंदू लोग जलाकर मारे गए थे। यह घटना इतनी दर्दनाक थी कि यह वर्षों से क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही थी। अब, योगी सरकार ने मामले की जांच कर इस काले अध्याय को फिर से उजागर करने का निर्णय लिया है।
1978 के दंगे: क्या हुआ था?
14 दिसंबर को कार्तिकेय महादेव मंदिर का ताला खुलने के बाद, 1978 के दंगा पीड़ितों ने अपने दर्दनाक अनुभवों को साझा किया था। रिपोर्ट के अनुसार, दंगे के दौरान कुछ हिंदू लोग नखासा इलाके में मुरारी की फड़ में छिपे थे, लेकिन इनमें से 25 लोगों को जिंदा जलाकर मार दिया गया। यह घटना एक बड़ा साम्प्रदायिक दंगा बन गई थी, जिसे आज तक याद किया जाता है।
सीएम योगी का बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में 1978 के दंगों का जिक्र करते हुए बताया कि संभल में 1947 से दंगों की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा कि 1947 में एक मौत, 1948 में छह मौतें, और 1958 व 1962 में भी दंगे हुए थे। इसके बाद 1976 में दंगे में पांच लोग मारे गए थे।
1978 के दंगों में 184 हिंदू समुदाय के लोग सामूहिक रूप से जलाकर मार दिए गए थे, लेकिन सरकार का मानना था कि मृतकों की संख्या 24 थी। सीएम योगी ने सदन में कहा कि इस तथ्य को विपक्ष स्वीकार नहीं करेगा, लेकिन यह सच्चाई है। इसके बाद भी 1980, 1982, 1990, 1992, और 1996 में भी दंगे हुए थे, जिसमें कई हिंदू मारे गए थे।
1947 से 1996 तक संभल में दंगों की लंबी सूची
संभल में 1947 से लेकर 1996 तक दंगों की लंबी और दुखद श्रृंखला रही है। 209 हिंदू लोगों की मौत हुई है, लेकिन इन मृतकों के लिए किसी ने भी संवेदनाएं तक व्यक्त नहीं की हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर भी चिंता जताई और कहा कि यह काले अध्याय को उजागर करने का समय आ गया है।
दंगा पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद
संभल के 1978 के दंगे की जांच का आदेश दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि इस जांच से सही तथ्य सामने आएंगे और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
योगी सरकार ने इस मामले में सख्त कदम उठाने की बात कही है, और जांच अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है। यह कदम न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाने का है, बल्कि पूरे प्रदेश में यह संदेश भेजेगा कि सरकार किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक हिंसा को बर्दाश्त नहीं करेगी।
संभल के 1978 के दंगे की जांच का आदेश उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के लिए एक बड़ा कदम है, जो 46 साल बाद लिया गया है। इससे दंगा पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। योगी सरकार ने इस मामले में जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है।
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