संगड़ाह की बेटी ने रचा सफलता का नया अध्याय, निजी स्कूल में पढ़ाते-पढ़ाते बनी गणित अध्यापिका
संगड़ाह क्षेत्र की होनहार बेटी ने निजी स्कूल में पढ़ाने के साथ लगातार मेहनत कर एचपीआरसीए परीक्षा में सफलता हासिल की। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने गणित अध्यापिका बनकर क्षेत्र का नाम रोशन किया। उनकी उपलब्धि आज क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा का संदेश बन गई है।
संगड़ाह
पहाड़ों में सपने देखना आसान नहीं होता…
सीमित संसाधनों, कठिन परिस्थितियों और लगातार संघर्ष के बीच जो युवा अपने लक्ष्य पर टिके रहते हैं, वही एक दिन मिसाल बनते हैं। संगड़ाह क्षेत्र की एक होनहार बेटी ने भी अपनी मेहनत, धैर्य और लगन के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिस पर आज पूरा क्षेत्र गर्व महसूस कर रहा है।एचपीआरसीए हमीरपुर द्वारा आयोजित परीक्षा में उनका चयन गणित अध्यापिका पद के लिए हुआ है। खास बात यह रही कि निजी स्कूल में सेवाएं देने के साथ-साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी और आखिरकार अपनी मेहनत को सफलता में बदल दिया।
उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा जवाहर नवोदय विद्यालय सरोल जिला चंबा से प्राप्त की। इसके अलावा उन्हें जवाहर नवोदय विद्यालय पेखूबेला जिला ऊना में भी छह माह तक अध्ययन करने का अवसर मिला। इसके बाद राजकीय महाविद्यालय नाहन से बीएससी ऑनर्स नॉन मेडिकल की पढ़ाई पूरी की।शिक्षक बनने के सपने को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने राजकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय धर्मशाला से बीएड तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से गणित विषय में एमएससी की डिग्री हासिल की। इसी दौरान उन्होंने एचपी टेट परीक्षा 105 अंकों के साथ उत्तीर्ण की तथा सीटेट पेपर-1 और पेपर-2 भी क्वालीफाई किया।
वर्ष 2020 से 2023 तक उन्होंने डॉ. आरकेवीएन पब्लिक स्कूल संगड़ाह में टीजीटी नॉन मेडिकल के रूप में सेवाएं दीं। नौकरी के साथ-साथ लगातार पढ़ाई करना और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।आज उनकी यह सफलता क्षेत्र की बेटियों के लिए भी प्रेरणा बन गई है। लोगों का कहना है कि पहाड़ की बेटियां अगर ठान लें, तो मेहनत के दम पर किसी भी मुकाम तक पहुंच सकती हैं। उनकी उपलब्धि पर क्षेत्रभर से बधाइयों का सिलसिला जारी है।