लेटेस्ट हिमाचल प्रदेश न्यूज़ हेडलाइंस

सफला एकादशी / साल की आखरी एकादशी को बन रहे हैं कुछ शुभ योग, जानें उनके बारे मे

हिमाचलनाउ डेस्क | 19 दिसंबर 2024 at 4:03 am

Share On WhatsApp Share On Facebook Share On Twitter

सनातन धर्म में एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। हिंदू धर्म ग्रंथों में भी इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। एकादशी का व्रत श्रद्धालुओं के लिए एक पवित्र अवसर है, जो भगवान श्रीहरि और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से पुण्य फल की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। हर वर्ष की तरह, साल 2024 की आखिरी एकादशी सफला एकादशी होगी, जो 26 दिसंबर, गुरुवार को पड़ रही है।


सफला एकादशी का महत्व

सफला एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपने जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता की कामना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि व्यक्ति के सारे कष्ट भी दूर हो जाते हैं। इस दिन का व्रत पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ रखने से विशेष आशीर्वाद मिलते हैं।


सफला एकादशी पर विशेष शुभ संयोग

इस वर्ष सफला एकादशी पर विशेष शुभ संयोग बन रहे हैं, जो इस व्रत को और भी अधिक महत्वपूर्ण बनाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सुकर्मा और धृति योग बन रहे हैं, जिन्हें शुभ माना जाता है। इन योगों का प्रभाव इस व्रत के अवसर पर विशेष रूप से सकारात्मक होगा। सुकर्मा योग में किए गए कार्यों में सफलता की प्राप्ति होती है, जबकि धृति योग स्थिरता और सफलता की ओर इंगीत करता है।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group

इसके अलावा, सफला एकादशी पर स्वाती और विशाखा नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। ज्योतिष में इन नक्षत्रों को भी शुभ माना जाता है। इन नक्षत्रों के साथ इस दिन पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

Read This Also : जानें डेट, शुभ महूर्त, महत्त्व और व्रत के नियम


व्रत नियम और पूजन मुहूर्त

सफला एकादशी व्रत का पालन करने के लिए कुछ विशेष नियम होते हैं। श्रद्धालुओं को इस दिन उपवासी रहकर भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। व्रत के दौरान सत्य बोलना, अहिंसा का पालन करना और ब्रह्मचर्य का ध्यान रखना आवश्यक होता है। साथ ही, व्रत के दिन विशेष रूप से सफ़लता, समृद्धि और मानसिक शांति की प्रार्थना की जाती है।

व्रत का पूजन मुहूर्त और समय भी महत्वपूर्ण होते हैं। इस दिन विशेष मुहूर्त में पूजा करना अधिक प्रभावी माना जाता है। सफला एकादशी के दिन विशेष रूप से दिन में या रात के समय विधिपूर्वक पूजा अर्चना करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।


निष्कर्ष

सफला एकादशी का व्रत सनातन धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत न केवल धार्मिक आस्था को बढ़ाता है, बल्कि श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाने में मदद करता है। इस दिन बनने वाले शुभ संयोग और नक्षत्रों का महत्व और अधिक बढ़ जाता है, जो व्रति को सफलता और सुख की ओर अग्रसर करते हैं। 26 दिसंबर 2024 को होने वाली सफला एकादशी के व्रत में शामिल होकर आप भी भगवान श्री विष्णु और माता लक्ष्मी के आशीर्वाद से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!

Join WhatsApp Group

आपकी राय, हमारी शक्ति!
इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया साझा करें


[web_stories title="false" view="grid", circle_size="20", number_of_stories= "7"]