सतलुज नदी में जमा मलबे और रेत पर हाई कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट, अधिकारियों को सर्वेक्षण के निर्देश
सतलुज नदी के विभिन्न मुहानों पर जमा रेत और मलबे को लेकर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को विस्तृत सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने शिमला और मंडी जिला प्रशासन सहित खनन विभाग से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
शिमला
सतलुज नदी के मुहानों पर सर्वेक्षण के निर्देश
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सतलुज नदी के विभिन्न मुहानों और नदी तटीय क्षेत्रों में जमा रेत, गाद और मलबे के संबंध में शिमला और मंडी के उपायुक्तों सहित खनन विभाग को विस्तृत सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने कहा कि संबंधित अधिकारी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सतलुज नदी के मुहानों का निरीक्षण करें और वहां मौजूद सामग्री की वास्तविक स्थिति का आकलन कर विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। न्यायालय ने यह भी कहा कि सर्वेक्षण व्यापक स्तर पर किया जाए ताकि उपलब्ध संसाधनों और उनके संभावित उपयोग के संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आ सके।
मलबे और रेत की मात्रा का होगा आकलन
खंडपीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नदी क्षेत्र में मौजूद रेत, गाद, मलबे और अन्य सामग्री की मात्रा का वैज्ञानिक आधार पर आकलन किया जाए। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया जाए कि उपलब्ध सामग्री का उपयोग प्रदेश में खनन गतिविधियों के लिए किस सीमा तक किया जा सकता है और क्या ऐसा करना पर्यावरणीय मानकों तथा प्रचलित नियमों एवं विनियमों के अनुरूप होगा। अदालत ने कहा कि यदि नियमों के तहत इसकी अनुमति संभव है तो उपलब्ध संसाधनों का उपयोग राज्य के हित में किया जा सकता है। इसके लिए संबंधित विभागों को तथ्यात्मक और तकनीकी जानकारी सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
जलाशय में गाद जमा होने का भी उठाया गया मुद्दा
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह सामान्य रूप से देखा जाता है कि सतलुज नदी के किनारों पर कई स्थानों पर रेत के बड़े जमाव मौजूद रहते हैं। मानसून के दौरान नदी में जल प्रवाह बढ़ने पर यह रेत और गाद पानी के साथ बहकर जलाशयों तक पहुंच जाती है। इससे जलाशयों में गाद जमा होने की मात्रा बढ़ सकती है। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि जब नदी का जलस्तर सामान्य रहता है, तब नदी के दोनों किनारों पर रेत के टीले स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। अदालत ने इस स्थिति के संबंध में विस्तृत तथ्यात्मक जानकारी जुटाने और उपलब्ध सामग्री के प्रबंधन की संभावनाओं का अध्ययन करने की आवश्यकता बताई है।
जनहित याचिका में उठाए गए कई विषय
यह मामला एक जनहित याचिका से संबंधित है, जिसमें तत्तापानी स्थित कोल बांध जलाशय क्षेत्र से पहले जमा अतिरिक्त गाद को हटाने और नदी क्षेत्र में आवश्यक निवारक उपाय अपनाने की मांग की गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि जलाशय क्षेत्र में गाद जमा होने से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त याचिका में सरकारी प्राथमिक विद्यालय तत्तापानी के लिए अलग भवन निर्माण, क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विकास तथा एक पुल के निर्माण से जुड़े विषय भी शामिल किए गए हैं। अदालत इन सभी पहलुओं पर संबंधित विभागों से जानकारी प्राप्त कर रही है।
रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की सुनवाई
उच्च न्यायालय ने शिमला और मंडी जिला प्रशासन तथा खनन विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे सर्वेक्षण पूरा कर विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें। रिपोर्ट में नदी क्षेत्र में उपलब्ध रेत और मलबे की मात्रा, उसके संभावित उपयोग, पर्यावरणीय प्रभावों तथा संबंधित विभागों द्वारा उठाए गए कदमों का विवरण शामिल किया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले की अगली सुनवाई में उपलब्ध तथ्यों और विभागीय निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्यवाही पर विचार किया जाएगा।