सड़क हादसे में मृत युवक के माता-पिता को 16.55 लाख रुपये मुआवजा देने के हाईकोर्ट के आदेश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले 25 वर्षीय युवक के माता-पिता को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि बढ़ाने का आदेश दिया है। न्यायालय ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा निर्धारित राशि को संशोधित करते हुए 16.55 लाख रुपये मुआवजा निर्धारित किया।
शिमला
हाईकोर्ट ने संशोधित किया मुआवजा
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना से जुड़े एक मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) द्वारा तय किए गए 4.86 लाख रुपये के मुआवजे को संशोधित करते हुए 16.55 लाख रुपये करने के आदेश दिए हैं। यह फैसला न्यायमूर्ति विरेंद्र सिंह की एकल पीठ ने सुनाया। अदालत ने मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड, मृतक की शैक्षणिक योग्यता, उसकी आय की संभावनाओं और अन्य कानूनी मानकों को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की राशि में वृद्धि की।
2008 की दुर्घटना से जुड़ा है मामला
यह मामला 27 मई 2008 का है, जब सिरमौर जिले के पांवटा साहिब क्षेत्र के भूपपुर में एक ट्रक दुर्घटना में 25 वर्षीय रणजीत सिंह की मृत्यु हो गई थी। दुर्घटना के बाद मृतक के माता-पिता ने मुआवजे के लिए दावा दायर किया था। प्रारंभिक स्तर पर एमएसीटी ने मृतक की काल्पनिक आय 5,000 रुपये प्रतिमाह मानते हुए 4,86,985 रुपये का मुआवजा निर्धारित किया था, जिसे बाद में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
आय का पुनर्मूल्यांकन किया गया
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि मृतक ने कंप्यूटर हार्डवेयर में डिप्लोमा किया था और दुर्घटना से लगभग एक महीने पहले अपने भाई के साथ एक औद्योगिक इकाई शुरू की थी। इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने यह माना कि उसकी आय केवल 5,000 रुपये प्रतिमाह मानना उचित नहीं था। अदालत ने मृतक की मासिक आय 10,000 रुपये निर्धारित की और उसमें 40 प्रतिशत भविष्य की संभावनाएं जोड़ते हुए, लागू कानूनी प्रावधानों और अन्य मदों के आधार पर कुल मुआवजा 16.55 लाख रुपये तय किया।
बीमा कंपनी को भुगतान के निर्देश
न्यायालय ने आदेश दिया कि संशोधित मुआवजा राशि का भुगतान आईसीआईसीआई लोम्बार्ड मोटर इंश्योरेंस कंपनी द्वारा किया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि याचिका दायर करने की तिथि से लेकर पूरी राशि के भुगतान तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।