शिमला ग्रीष्मोत्सव 2026 में नशा उन्मूलन थीम आधारित महानाटी MAA का आयोजन किया जाएगा कार्यक्रम निर्धारित समय पर आयोजित
अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव 2026 के अंतर्गत नशा उन्मूलन, सामाजिक जागरूकता तथा महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से थीम आधारित महानाटी ‘MAA (Mothers Against Abuse and Addiction)’ का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं, स्वयं सहायता समूह, विद्यार्थी तथा सामाजिक संगठन भाग लेंगे और विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रस्तुत करेंगे।
शिमला
कार्यक्रम का उद्देश्य
अंतरराष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव-2026 के अंतर्गत आयोजित यह थीम आधारित महानाटी ‘MAA (Mothers Against Abuse and Addiction)’ समाज में नशा उन्मूलन के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित न रहकर सामाजिक संदेश को प्रभावी रूप से जन-जन तक पहुंचाना है। इसके माध्यम से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता तथा समाज में व्याप्त नशे की समस्या के दुष्प्रभावों को तथ्यात्मक रूप से उजागर किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन समुदाय स्तर पर व्यवहार परिवर्तन और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आयोजन का विवरण
यह विशेष थीम आधारित कार्यक्रम 09 जून 2026 को दोपहर 3 बजे से सायं 5 बजे तक पुलिस सहायता कक्ष के समीप आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम की अवधि लगभग 2 घंटे निर्धारित की गई है, जिसमें शिमला जिले के विभिन्न आईसीडीएस खण्डों से लगभग 250 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं भाग लेंगी। इनके माध्यम से नाट्य प्रस्तुति और सामूहिक प्रदर्शन किए जाएंगे, जिनमें सामाजिक संदेशों को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम स्थल पर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति भी संभावित है और सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं के लिए आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं।
मुख्य संदेश
इस महानाटी का केंद्रीय संदेश “मां की ममता, समाज की शक्ति” रखा गया है, जिसके माध्यम से माताओं की भूमिका को समाज सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम में यह संदेश दिया जाएगा कि परिवार और समाज में नशा उन्मूलन की शुरुआत घर से होती है और इसमें माताओं की भूमिका निर्णायक होती है। इसके अलावा पारिवारिक मूल्यों की मजबूती, बच्चों के सुरक्षित भविष्य और सामाजिक संतुलन बनाए रखने पर भी विस्तृत प्रस्तुति दी जाएगी। प्रस्तुति के माध्यम से यह भी दर्शाया जाएगा कि सामूहिक प्रयासों से नशा मुक्त समाज की परिकल्पना को व्यवहारिक रूप दिया जा सकता है।
सामाजिक सहभागिता
कार्यक्रम में केवल आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तक ही सीमित भागीदारी नहीं होगी, बल्कि स्वयं सहायता समूहों, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय समुदाय के लोगों की भी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से नशे के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान को व्यापक रूप दिया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा, घरेलू हिंसा की रोकथाम और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों को भी नाट्य प्रस्तुति का हिस्सा बनाया जाएगा, ताकि समाज के विभिन्न वर्गों तक स्पष्ट और प्रभावी संदेश पहुंच सके।
हेल्पलाइन जानकारी
कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 तथा महिला हेल्पलाइन 181 की सेवाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इन हेल्पलाइन नंबरों के उपयोग और उनकी कार्यप्रणाली को समझाया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोग तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें। प्रशासन का उद्देश्य है कि समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर बच्चों और महिलाओं को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए इन सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए।
प्रशासनिक अपील
जिला प्रशासन शिमला तथा महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी नागरिकों से इस जन-जागरूकता कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज में नशा उन्मूलन, सुरक्षा और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूती मिलती है तथा एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण में सहयोग प्राप्त होता है।