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24 वर्ष बाद हामटा पहुंचेंगे श्रृंगा ऋषि, देव परंपराओं के तहत होगा जमलू महाराज से मिलन

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

ऊझी घाटी में जुलाई माह के दौरान श्रृंगा ऋषि के हामटा दौरे का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। देव परंपराओं के अनुसार आयोजित होने वाली इस यात्रा में श्रृंगा ऋषि देव रथ और पारंपरिक लश्कर के साथ हामटा पहुंचेंगे। यात्रा के दौरान जमलू महाराज से पारंपरिक मिलन कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। आयोजन से संबंधित तैयारियां और व्यवस्थाएं स्थानीय स्तर पर निर्धारित परंपराओं के अनुसार की जा रही हैं।

मनाली

5 जुलाई को हामटा के लिए प्रस्थान करेंगे श्रृंगा ऋषि

ऊझी घाटी में देव परंपराओं के अंतर्गत श्रृंगा ऋषि का हामटा दौरा आयोजित किया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 5 जुलाई को श्रृंगा ऋषि देव रथ और पारंपरिक लश्कर के साथ हामटा के लिए प्रस्थान करेंगे। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह दौरा लगभग 24 वर्ष बाद आयोजित हो रहा है, जिसके चलते संबंधित क्षेत्रों में तैयारियां की जा रही हैं। देव परंपराओं के अनुसार विशेष यात्राओं से पूर्व पांच कोठी के प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में झाड़ा कहा जाता है। 14 जून को आयोजित बैठक में हामटा दौरे को स्वीकृति प्रदान करते हुए यात्रा कार्यक्रम, पड़ावों और अन्य व्यवस्थाओं की रूपरेखा तय की गई।

देव परंपराओं के अनुसार की जा रही तैयारियां

श्रृंगा ऋषि के पुजारी इंद्र देव ने बताया कि यात्रा के आयोजन को लेकर आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम देव परंपराओं और निर्धारित रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित किया जाएगा तथा यात्रा से जुड़े सभी पारंपरिक अनुष्ठानों का पालन किया जाएगा। आयोजन से जुड़े प्रतिनिधियों द्वारा मार्ग, पड़ाव, श्रद्धालुओं की सुविधा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर समन्वय किया जा रहा है। यात्रा में विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित प्रतिनिधियों, हरियानों और श्रद्धालुओं की भागीदारी रहने की संभावना है।

हामटा में निर्धारित है प्रमुख पड़ाव

स्थानीय जानकारी के अनुसार हामटा का प्रमुख पड़ाव समुद्र तल से लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। देव यात्रा के दौरान यहां पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और निर्धारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यात्रा में पांच कोठी के हरियान, पारंपरिक वाद्य यंत्रों से सुसज्जित देव दल तथा अन्य सहभागी शामिल होंगे। आयोजन से संबंधित व्यवस्थाओं, यात्रा मार्ग, सुरक्षा और समन्वय को लेकर स्थानीय स्तर पर तैयारियां जारी हैं। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से भी लोगों के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

देव संस्कृति से जुड़ी परंपरा का हिस्सा है आयोजन

स्थानीय स्तर पर इस यात्रा को क्षेत्र की पारंपरिक देव संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण आयोजनों में शामिल माना जाता है। देव यात्राओं के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं का निर्वहन किया जाता है तथा पीढ़ियों से चली आ रही व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाया जाता है। श्रृंगा ऋषि और जमलू महाराज से जुड़े ऐसे आयोजन कुल्लू क्षेत्र की पारंपरिक देव व्यवस्था का हिस्सा माने जाते हैं। आयोजन समिति से जुड़े लोगों के अनुसार कार्यक्रम निर्धारित परंपराओं और समय-सारिणी के अनुसार संपन्न कराया जाएगा तथा यात्रा के दौरान सभी धार्मिक प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।