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सिरमौर में कांग्रेस का संगठन क्यों लड़खड़ाया? प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार पर उठने लगे सवाल

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 1 Hour Ago • 1 Min Read

सिरमौर में पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकाय चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस संगठन की कार्यशैली और नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भाजपा जिला परिषद से लेकर पंचायत स्तर तक अपनी बढ़त का दावा कर रही है, जबकि कांग्रेस को संगठनात्मक मजबूती पर आत्ममंथन की जरूरत महसूस हो रही है। चुनावी नतीजों ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार और भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल की राजनीतिक सक्रियता को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

चम्बा

पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकाय चुनावों के परिणामों ने जिला सिरमौर को एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि प्रदेश भाजपा और प्रदेश कांग्रेस, दोनों के संगठनात्मक मुखिया इसी जिले से आते हैं। ऐसे में इन चुनावों को केवल स्थानीय निकायों का जनादेश नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर पर दोनों नेताओं की राजनीतिक और संगठनात्मक क्षमता की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।चुनाव परिणामों के बाद सबसे अधिक चर्चा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार को लेकर हो रही है। सत्ता में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद जिला सिरमौर में पार्टी संगठन अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाया। दूसरी ओर भाजपा लगातार दावा कर रही है कि जिला परिषद की 17 में से 13 सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार विजयी हुए हैं। पंचायत समितियों और कई पंचायतों में भी भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की मजबूत उपस्थिति दर्ज हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी जिले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष स्वयं सक्रिय हों और वहीं पार्टी संगठन अपेक्षित बढ़त हासिल न कर सके, तो स्वाभाविक रूप से नेतृत्व और संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं। यही कारण है कि चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस के भीतर और बाहर दोनों जगह विनय कुमार के नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है।इसके उलट प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल पूरे चुनाव अभियान के दौरान अत्यंत सक्रिय दिखाई दिए। न केवल नाहन विधानसभा क्षेत्र बल्कि जिला सिरमौर के विभिन्न हिस्सों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में उनकी मौजूदगी लगातार बनी रही। जिला परिषद, पंचायत समिति और पंचायत स्तर तक संगठनात्मक समन्वय स्थापित करने में भाजपा अपेक्षाकृत अधिक सफल नजर आई। भाजपा खेमे का मानना है कि यही सक्रियता चुनावी परिणामों में दिखाई भी दी।

पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में विधायक रीना कश्यप के नेतृत्व में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने मजबूत प्रदर्शन किया। वहीं शिलाई विधानसभा क्षेत्र में भी चुनाव परिणामों ने कई राजनीतिक संकेत दिए हैं। प्रदेश सरकार में मंत्री हर्षवर्धन चौहान के प्रभाव क्षेत्र में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों की उल्लेखनीय मौजूदगी ने यह संदेश दिया है कि कांग्रेस के लिए यह क्षेत्र अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। पूर्व विधायक बलदेव तोमर का प्रभाव भी क्षेत्र में कायम दिखाई दिया, जिससे वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।हालांकि पूरे जिले की तस्वीर को केवल भाजपा की बढ़त और कांग्रेस की कमजोरी तक सीमित करना भी अधूरा विश्लेषण होगा। नाहन विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी ने अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखी है। विधानसभा चुनाव में उनका जीत का अंतर पहले की तुलना में अधिक रहा था और स्थानीय निकाय चुनावों में भी कांग्रेस समर्थित खेमे ने पहले के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है।

नाहन नगर परिषद में कांग्रेस की स्थिति पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होकर उभरी है। जिन उम्मीदवारों को कांग्रेस समर्थक माना जा रहा था, उन्होंने चुनाव में प्रभावशाली प्रदर्शन किया। परिणामस्वरूप नगर परिषद में कांग्रेस और भाजपा के बीच शक्ति संतुलन की स्थिति बनी हुई है। राजनीतिक जानकार इसे अजय सोलंकी की स्थानीय स्वीकार्यता और नाहन में कांग्रेस की मजबूत होती स्थिति के रूप में देख रहे हैं।पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र में भी मुकाबला पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा। यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों का प्रभाव दिखाई दिया। हालांकि भाजपा ने निर्दलीय विजेताओं के साथ बेहतर राजनीतिक तालमेल बनाकर अपने पक्ष को मजबूत करने का प्रयास किया है। वहीं कुछ निर्दलीय जीतों ने भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को और रोचक बना दिया है।

इन चुनावों का सबसे बड़ा राजनीतिक निष्कर्ष यह निकलकर सामने आया है कि सिरमौर में भाजपा संगठन चुनावी मोर्चे पर अधिक आक्रामक और संगठित नजर आया, जबकि कांग्रेस सरकार में होने के बावजूद उसी स्तर की संगठनात्मक मजबूती नहीं दिखा सकी। यही कारण है कि चुनाव परिणामों के बाद भाजपा खेमा डॉ. राजीव बिंदल की रणनीति और सक्रियता को अपनी सफलता का आधार बता रहा है, जबकि कांग्रेस के सामने अपने संगठन को लेकर गंभीर आत्ममंथन की स्थिति बन गई है।

वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों ने इतना जरूर संकेत दे दिया है कि सिरमौर में राजनीतिक लड़ाई अब केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि संगठनात्मक क्षमता की भी लड़ाई बन चुकी है। फिलहाल इस मुकाबले में भाजपा आत्मविश्वास से भरी दिखाई दे रही है, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार के सामने अपने ही जिले से उठे सवालों का जवाब संगठनात्मक मजबूती के जरिए देने की चुनौती खड़ी हो गई है।

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