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स्मॉल हाइव बीटल से नुकसान की जल्द बनेगी रिपोर्ट, मधुमक्खी पालकों ने उठाई शहद के एमएसपी की मांग

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 18 Hours Ago • 1 Min Read

शाहपुर में आयोजित जागरूकता शिविर के दौरान विधायक एवं उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने स्मॉल हाइव बीटल से मधुमक्खी पालकों को हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट जल्द तैयार करने के निर्देश दिए। शिविर में पालकों ने हिमाचल प्रदेश में शहद का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और मुख्यमंत्री मधु विकास योजना के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध करवाने की मांग भी उठाई।

शाहपुर

मिनी सचिवालय शाहपुर में वीरवार को बागवानी विभाग ने मधुमक्खी पालकों के लिए जागरूकता शिविर आयोजित किया। इसकी अध्यक्षता केवल सिंह पठानिया ने की। उन्होंने एसडीएम शाहपुर को संबंधित पंचायतों के पटवारियों के माध्यम से नुकसान का आकलन करवाकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के आधार पर मामला मुख्यमंत्री और बागवानी मंत्री के समक्ष उठाया जाएगा, ताकि प्रभावित मधुमक्खी पालकों को सहायता दिलाने की दिशा में कार्रवाई की जा सके।

केवल सिंह पठानिया ने कहा कि मधुमक्खी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है और कांगड़ा के शहद की देशभर में पहचान रही है। उन्होंने शाहपुर क्षेत्र के 29 पंजीकृत मधुमक्खी पालकों की सोसायटी गठित करने का सुझाव दिया। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया। शिविर में मधुमक्खी पालकों को स्मॉल हाइव बीटल से होने वाले नुकसान और इसकी रोकथाम के उपायों की जानकारी दी गई।

शाहपुर क्षेत्र में करीब 40 प्रतिशत नुकसान का आकलन

बागवानी विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. कमलशील नेगी ने बताया कि उत्तरी क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर अब तक 14 जागरूकता शिविर लगाए जा चुके हैं। विभाग के आकलन के अनुसार स्मॉल हाइव बीटल से जिला कांगड़ा में मधुमक्खी पालकों को लगभग 32 प्रतिशत नुकसान हुआ है, जबकि शाहपुर विधानसभा क्षेत्र में यह आंकड़ा करीब 40 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि जिले में मधुमक्खी पालकों की सहायता के लिए बी-कीपिंग सेल भी स्थापित किया गया है।

डॉ. सुरेंद्र और डॉ. निशा ने स्मॉल हाइव बीटल के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए मधुमक्खियों तथा हाइव को सुरक्षित रखने के उपाय बताए। बागवानी विभाग के उपनिदेशक अलक्ष पठानिया ने विधायक को विभाग की ओर से निर्देशों और सुझावों की अनुपालना सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। विभाग ने शिविर के दौरान स्मॉल हाइव बीटल के आक्रमण और प्रबंधन से संबंधित प्रचार सामग्री भी मधुमक्खी पालकों को वितरित की।

शहद का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने की मांग

मधुमक्खी पालकों ने उनकी समस्याओं को प्राथमिकता से सुनने और कार्रवाई शुरू करवाने के लिए विधायक का आभार जताया। उन्होंने आग्रह किया कि अन्य राज्यों की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी शहद का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने का मामला सरकार के समक्ष उठाया जाए। इसके साथ ही पालकों ने मुख्यमंत्री मधु विकास योजना के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध करवाने की मांग रखी, जिससे मधुमक्खी पालन से जुड़े लोगों को योजनाओं का समुचित लाभ मिल सके।

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