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Supreme Court / औद्योगिक बिजली रियायत नीति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, हाईकोर्ट का आदेश निरस्त

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 58 Mins Ago • 1 Min Read

Supreme Court : उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश की औद्योगिक नीति से जुड़े बिजली रियायत मामले में राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि रियायती बिजली दरों का लाभ केवल नई औद्योगिक इकाइयों के लिए लागू होगा, जबकि बड़े स्तर पर विस्तार कर रही मौजूदा इकाइयों को यह सुविधा नहीं मिलेगी।

शिमला

औद्योगिक बिजली रियायत मामले में सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश की औद्योगिक नीति और बिजली शुल्क रियायत से जुड़े मामले में विस्तृत फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की वर्ष 2019 की औद्योगिक नीति में दी गई रियायती बिजली दरों की व्यवस्था केवल नई औद्योगिक इकाइयों के लिए लागू की गई थी। अदालत ने कहा कि बड़े पैमाने पर विस्तार कर रही मौजूदा औद्योगिक इकाइयों को इस श्रेणी में शामिल नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने किया निरस्त

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मई 2025 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें राज्य सरकार को एक निजी औद्योगिक इकाई को ऊर्जा शुल्क पर 15 प्रतिशत छूट देने के निर्देश दिए गए थे। संबंधित कंपनी ने अपनी पहले से संचालित औद्योगिक इकाई में बड़े स्तर पर विस्तार किया था और उसी आधार पर रियायती बिजली दरों का लाभ मांगा था। शीर्ष अदालत ने कहा कि नीति की मूल भावना और नियमों की व्याख्या के अनुसार यह लाभ केवल नई स्थापित इकाइयों तक सीमित था।

धारा 16(ए) और 16(बी) की अलग-अलग व्याख्या

पीठ ने अपने फैसले में वर्ष 2019 की औद्योगिक नीति की धारा 16(ए) और धारा 16(बी) का विशेष उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि धारा 16(ए) के तहत दी गई रियायती बिजली दरों का प्रावधान नई औद्योगिक इकाइयों के लिए था, जबकि धारा 16(बी) में बड़े पैमाने पर विस्तार कर रही मौजूदा औद्योगिक इकाइयों के लिए अलग प्रकार की छूट व्यवस्था निर्धारित की गई थी। अदालत ने यह भी कहा कि दोनों श्रेणियों को एक समान मानना नीति की मूल संरचना के विपरीत होगा।

शुल्क आदेशों और नीति संरचना का अदालत ने किया उल्लेख

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2019 की औद्योगिक नीति से पहले और बाद में जारी शुल्क आदेशों, संबंधित नियमों और नीति की समग्र संरचना से यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने नई इकाइयों और विस्तार कर रही इकाइयों के लिए अलग-अलग प्रावधान बनाए थे। अदालत ने कहा कि औद्योगिक नीति की व्याख्या करते समय इन सभी प्रशासनिक और कानूनी दस्तावेजों को एक साथ पढ़ना आवश्यक है।

अप्रैल 2022 के संशोधन नोटिस पर भी हुई चर्चा

सुनवाई के दौरान अदालत ने अप्रैल 2022 में जारी संशोधन नोटिस के प्रभाव पर भी विचार किया। पीठ ने कहा कि संशोधन नोटिस का उद्देश्य नीति की व्याख्या को स्पष्ट करना था और इससे यह संकेत नहीं मिलता कि विस्तार कर रही मौजूदा इकाइयों को नई इकाइयों के समान बिजली रियायत का लाभ दिया जाना था। अदालत ने माना कि नीति के प्रावधानों की अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार ही व्याख्या की जानी चाहिए।

राज्य सरकार की नीति को मिली कानूनी स्पष्टता

फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश सरकार की औद्योगिक बिजली रियायत नीति को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट हो गई है। अदालत के निर्णय से यह तय हो गया है कि ऊर्जा शुल्क में रियायत का लाभ केवल नई स्थापित औद्योगिक इकाइयों को ही मिलेगा। वहीं, बड़े पैमाने पर विस्तार कर रही इकाइयों के लिए नीति में अलग प्रावधान और छूट व्यवस्था लागू रहेगी।

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