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स्वाइन फ्लू के लक्षण नजरअंदाज न करें, स्वास्थ्य विभाग ने सावधानी बरतने की दी सलाह

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 1 Hour Ago • 1 Min Read

ऊना में स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से स्वाइन फ्लू और मौसमी इन्फ्लुएंजा से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव वर्मा ने कहा कि फ्लू जैसे लक्षणों को सामान्य वायरल बुखार समझकर नजरअंदाज न करें और समय पर चिकित्सकीय परामर्श लें। संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य संस्थानों में निगरानी बढ़ाने के साथ आवश्यक दवाओं, जांच सामग्री और उपचार संबंधी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है।

ऊना/वीरेंद्र बन्याल

डॉ. संजीव वर्मा ने बताया कि स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा वायरस-ए के एच1एन1 स्ट्रेन से होने वाला संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने और थूकने से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से यह दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। उन्होंने लोगों से व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखने और संक्रमण से बचाव के उपाय अपनाने को कहा। उनके अनुसार सावधानी, समय पर पहचान और उचित उपचार से संक्रमण को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।

तेज बुखार और सांस लेने में कठिनाई पर रहें सतर्क

सीएमओ के अनुसार स्वाइन फ्लू के लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं। इनमें तेज बुखार, खांसी, बलगम, पूरे शरीर में दर्द, अत्यधिक थकान, ठंड लगना और कंपकंपी शामिल हैं। लगातार छींकें आना, तेज सिरदर्द, छाती में भारीपन और सांस लेने में कठिनाई भी इसके लक्षण हो सकते हैं। ऐसे संकेत दिखाई देने पर बीमारी को सामान्य बुखार मानकर टालने के बजाय शीघ्र स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क कर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

डॉ. वर्मा ने बताया कि पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों से पीड़ित और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इन वर्गों के लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए, ताकि बीमारी की पहचान और आवश्यक उपचार में देरी न हो।

स्वच्छता और दूरी से संक्रमण रोकने की सलाह

स्वास्थ्य विभाग ने खांसते और छींकते समय मुंह तथा नाक को साफ रूमाल या टिशू से ढकने की सलाह दी है। इस्तेमाल किए गए रूमाल और कपड़ों को दोबारा प्रयोग करने से पहले अच्छी तरह धोकर धूप में सुखाना चाहिए। हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोने के साथ बार-बार आंख, नाक और मुंह को छूने से बचना चाहिए। इन सावधानियों को अपनाकर संक्रमण के प्रसार का खतरा कम किया जा सकता है।

फ्लू जैसे लक्षण होने पर स्कूल, कार्यालय और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर जाने से परहेज करने को कहा गया है। संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए दूसरे व्यक्ति से कम से कम एक मीटर की दूरी बनाए रखने तथा लक्षण होने पर दूसरों को छूने और हाथ मिलाने से बचने की सलाह दी गई है। रोगी को पर्याप्त आराम करना चाहिए और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से लक्षण बढ़ने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लेने को कहा है।

स्वास्थ्य संस्थानों में निगरानी और तैयारियां मजबूत

प्रदेश में मौसमी इन्फ्लुएंजा की निगरानी मजबूत करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों को फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों और गंभीर श्वसन संक्रमण के मामलों की निगरानी तथा दैनिक रिपोर्टिंग के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में आवश्यक दवाओं, जांच किट, वीटीएम, पीपीई किट और एन-95 मास्क सहित जरूरी सामग्री का पर्याप्त भंडार रखने को कहा गया है। गंभीर मरीजों के लिए बेड और वेंटिलेटर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने पर जोर दे रही है। मामलों की निगरानी, समय पर पहचान और उपचार के साथ अस्पतालों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना इन प्रयासों का हिस्सा है। जिलाधीश ऊना जतिन लाल ने कहा कि जिले में स्वाइन फ्लू, स्क्रब टाइफस और अन्य जीवाणु तथा वायरस जनित रोगों से बचाव के लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं।

जिलाधीश ने बताया कि जागरूकता अभियानों का उद्देश्य लोगों को बीमारियों के लक्षणों और बचाव के उपायों की जानकारी देने के साथ उनसे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। उन्होंने जिले के लोगों से स्वास्थ्य विभाग की ओर से सुझाई गई सावधानियों का पालन करने की अपील की। साथ ही कहा कि फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर देरी किए बिना नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क कर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

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