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Una / मानसिक बीमारी और बौद्धिक अक्षमता वाले व्यक्तियों को कानूनी सेवाएं देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम

हिमाचलनाउ डेस्क • 21 Dec 2024 • 1 Min Read

Himachalnow / ऊना / वीरेंद्र बन्याल

ऊना, 20 दिसंबर:
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में मानसिक बीमारी और बौद्धिक अक्षमता वाले व्यक्तियों को कानूनी सेवाएं प्रदान करने के लिए एक दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया गया, जो राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देशानुसार चलाया जा रहा है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

स्थान: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सेमिनार हॉल, ऊना
कार्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जिसमें सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ओपी शर्मा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनीता शर्मा, ऊना पैनल अधिवक्ता और पीएलवी ने भाग लिया।

उद्देश्य और महत्व

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक बीमारी और बौद्धिक अक्षमता से प्रभावित व्यक्तियों को कानूनी सेवाएं प्रदान करना है। कार्यक्रम की सचिव अनीता शर्मा ने बताया कि कानूनी सहायता सेवाओं का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि न्याय सभी के लिए सुलभ हो। मानसिक बीमारी और विकलांगता से पीड़ित लोग अक्सर समाज से उपेक्षित होते हैं, और इन्हें कानूनी मदद की आवश्यकता होती है।

उन्होंने कहा कि 2015 में राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत मानसिक रूप से बीमार और विकलांग व्यक्तियों के लिए कानूनी सेवाओं की एक प्रभावी योजना बनाई गई। इन व्यक्तियों को उनके सभी मानवाधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं का पूरा लाभ मिल सके, इसके लिए कानूनी सेवा प्राधिकरण प्रतिबद्ध है।

कानूनी सेवा यूनिट का गठन

इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक कानूनी सेवा यूनिट का गठन किया गया है, जिसमें डालसा सचिव, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पैनल अधिवक्ता और पीएलवी को शामिल किया गया है।

प्रशिक्षण का आयोजन

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 21 दिसंबर, 2024 को भी जारी रहेगा। कार्यक्रम प्रातः 9:30 बजे से लेकर सायं 5:00 बजे तक आयोजित किया जाएगा।

उपस्थित विशेषज्ञ

इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय अस्पताल ऊना के डॉ. नवदीप जोशी और जिला कोर्ट ऊना के अधिवक्ता सुरेश ऐरी भी उपस्थित रहे।

निष्कर्ष:
इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम मानसिक बीमारी और विकलांगता से प्रभावित व्यक्तियों के लिए कानूनी सहायता को सुलभ बनाने में मदद करेंगे, ताकि उन्हें न्याय की समान पहुंच मिल सके और उनके अधिकारों की रक्षा हो सके।

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