Turmeric Farming / 150 रुपये किलो समर्थन मूल्य से हल्दी की खेती को बढ़ावा, बैजनाथ के किसान फसल विविधीकरण से तलाश रहे आय के नए रास्ते
पारंपरिक फसलों को आवारा पशुओं और जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान के बीच कांगड़ा जिले के बैजनाथ क्षेत्र में किसान अब वैकल्पिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। सुनपुर गांव में हल्दी की खेती किसानों के लिए ऐसा ही विकल्प बन रही है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित हल्दी के लिए प्रदेश सरकार की ओर से 150 रुपये प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य निर्धारित किए जाने से किसानों को बेहतर आमदनी की उम्मीद है।
कांगड़ा/बैजनाथ
पारंपरिक फसलों के साथ हल्दी की खेती की ओर बढ़ा रुझान
कृषि में फसल विविधीकरण के जरिए किसान एक ही फसल पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में वैकल्पिक फसलों की जरूरत महसूस की जा रही है, जहां आवारा पशुओं और जंगली जानवरों के कारण पारंपरिक फसलों को नुकसान पहुंचता है। बैजनाथ उपमंडल के सुनपुर गांव में किसानों ने धान और मक्की जैसी परंपरागत फसलों के साथ हल्दी की खेती को भी अपनाना शुरू किया है। हल्दी की बाजार में मांग और प्राकृतिक खेती से इसके उत्पादन पर मिल रहे समर्थन मूल्य को देखते हुए किसान इसे अतिरिक्त आमदनी के विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

हल्दी के लिए 150 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य
प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती से उत्पादित विभिन्न फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध करवा रही है। इनमें गेहूं, मक्का और जौ के साथ हल्दी को भी शामिल किया गया है। हल्दी के लिए 150 रुपये प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। खाद्य पदार्थों और मसालों के साथ विभिन्न प्रसंस्कृत उत्पादों में हल्दी का व्यापक इस्तेमाल होने के कारण इसकी बाजार में मांग बनी रहती है। ऐसे में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार हल्दी की खेती किसानों के लिए आय का अतिरिक्त स्रोत तैयार कर सकती है।
सुनपुर की प्रवीण कुमारी ने पारंपरिक फसलों के साथ लगाई हल्दी
सुनपुर गांव की किसान प्रवीण कुमारी अपने खेतों में धान और मक्की सहित विभिन्न फसलें उगाती हैं। इस बार उन्होंने इनके साथ हल्दी की खेती भी की है। उनके मुताबिक हल्दी की फसल तैयार होने में करीब एक वर्ष का समय लगता है, लेकिन बाजार में इसकी अच्छी मांग होने के कारण इससे आमदनी की संभावना बनी रहती है। प्रवीण कुमारी का कहना है कि हल्दी की खेती अपनाने से किसान अपनी फसलों में विविधता ला सकते हैं। सरकार की ओर से इसके लिए बेहतर मूल्य मिलने से भी किसानों का रुझान बढ़ रहा है।
90 रुपये से बढ़कर करीब 150 रुपये तक पहुंचा मूल्य
प्रवीण कुमारी के अनुसार पहले हल्दी की कीमत करीब 90 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जबकि अब सरकार की ओर से इसका समर्थन मूल्य करीब 150 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। कीमत में इस बढ़ोतरी से किसानों को हल्दी उत्पादन से बेहतर आमदनी की उम्मीद जगी है। हल्दी जैसी वैकल्पिक फसल को अपनाने से किसान पारंपरिक खेती के साथ आय का दूसरा माध्यम विकसित कर सकते हैं। इससे किसी एक फसल पर उनकी निर्भरता भी कम हो सकती है।
सुजाता देवी भी हल्दी को मान रहीं बेहतर विकल्प
सुनपुर की किसान सुजाता देवी भी हल्दी की खेती को लाभकारी विकल्प के रूप में देख रही हैं। उनका कहना है कि वैकल्पिक फसल के रूप में हल्दी किसानों के लिए नई संभावनाएं लेकर आई है। सरकार की ओर से हल्दी की प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन और 150 रुपये प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य मिलने से किसानों को बेहतर आय की उम्मीद है। सुनपुर में किसानों का यह प्रयास फसल विविधीकरण के माध्यम से कृषि आय के नए विकल्प तलाशने की दिशा में एक पहल के रूप में सामने आया है।