अमेरिकी अदालत ने चार साल की वीजा सीमा पर लगाई रोक, भारतीय छात्रों को राहत
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन के उस प्रस्तावित नियम के अमल पर रोक लगा दी है, जिसमें F-1 और J-1 वीजाधारकों के अमेरिका में रहने की अवधि सीमित करने का प्रावधान था। फैसले से अमेरिका में पढ़ रहे और उच्च शिक्षा की योजना बना रहे भारतीय छात्रों को फिलहाल राहत मिली है। नियम लागू होने पर विदेशी छात्रों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों से जुड़े लोगों के प्रवास की अधिकतम अवधि चार साल हो जाती।
बोस्टन
अमेरिकी जिला जज एफ. डेनिस सेलॉर ने सोमवार को डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी को प्रस्तावित नियम लागू करने से रोक दिया। इसे अगले दिन से प्रभावी किया जाना था। बदलाव के तहत F-1 वीजा पर पढ़ने वाले विदेशी छात्रों और J-1 वीजा वाले सांस्कृतिक आदान-प्रदान आगंतुकों के लिए अधिकतम चार वर्ष की अवधि तय की जानी थी। विदेशी पत्रकारों के लिए भी 240 दिन की समय-सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव था।
लंबे पाठ्यक्रमों और शोध कार्यक्रमों पर असर
यह निर्णय भारतीय छात्रों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी संख्या में विद्यार्थी अमेरिका में पीएचडी, उन्नत शोध और लंबी अवधि के पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेते हैं। शोध, प्रयोगशाला कार्य, थीसिस या अकादमिक देरी के कारण ऐसे कार्यक्रमों को पूरा करने में चार वर्ष से अधिक समय लग सकता है। प्रस्तावित सीमा लागू होने पर छात्रों को पढ़ाई के दौरान अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन करना पड़ता या उनकी शैक्षणिक योजना प्रभावित हो सकती थी।
मौजूदा ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ व्यवस्था के अंतर्गत छात्र अपना अकादमिक स्टेटस सही रखते हुए और पढ़ाई जारी रहने तक अमेरिका में रह सकते हैं। इसमें किसी निश्चित वर्ष की सीमा नहीं है। अदालत की रोक के बाद फिलहाल यही पुरानी व्यवस्था प्रभावी रहेगी। इससे भारतीय छात्रों को डिग्री अधूरी छोड़ने की आशंका, बार-बार वीजा अवधि बढ़ाने के आवेदन, प्रशासनिक खर्च और कागजी प्रक्रिया से जुड़ी अनिश्चितता से तत्काल राहत मिली है।
अदालत ने उच्च शिक्षा पर प्रभाव का मुद्दा उठाया
ट्रंप प्रशासन पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर प्रवास को निश्चित अवधि में बांधना चाहता था। जज सेलॉर ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के तर्कों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रस्तावित बदलाव से अमेरिकी उच्च शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। अमेरिका में लगभग 16 लाख F वीजा और पांच लाख J वीजाधारक हैं। अदालत ने नियम लागू होने पर विश्वविद्यालयों में दाखिले घटने और संस्थानों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका भी जताई।
अदालत का यह आदेश भारतीय छात्रों को तात्कालिक राहत देता है, लेकिन इससे कानूनी प्रक्रिया समाप्त नहीं हुई है। ट्रंप प्रशासन फैसले के विरुद्ध ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है और आव्रजन नियमों को सख्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है। ऐसे में अमेरिका में पढ़ रहे छात्रों के लिए अपना कानूनी और अकादमिक स्टेटस बनाए रखना तथा विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस के दिशा-निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण रहेगा।
भविष्य में अमेरिका जाकर पढ़ाई करने की योजना बना रहे छात्रों को ट्यूशन फीस और छात्रवृत्ति के साथ बदलते आव्रजन नियमों पर भी नजर रखनी होगी। फिलहाल ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ व्यवस्था जारी रहने से छात्रों को तय चार वर्षीय सीमा के बिना अपने शैक्षणिक कार्यक्रम पूरे करने का अवसर मिलेगा। हालांकि आगे की स्थिति संभावित अपील और कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगी, इसलिए यह राहत वर्तमान व्यवस्था के बने रहने तक प्रभावी मानी जाएगी।